लखनऊ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने केजीएमयू प्रशासन के सहयोग से हस्साम अहमद नामक एक जालसाज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपी खुद को 2017 बैच का केजीएमयू पासआउट डॉक्टर बताकर इंटर्न छात्राओं को अपने जाल में फंसाता था। जांच में यह भी सामने आया कि उसके साथ मोहम्मद फैज और फईक अहमद मंसूरी जैसे सहयोगी जुड़े हुए थे, जो लड़कियों को मेडिकल कैंप के बहाने अलग-अलग इलाकों में ले जाते थे।
मेडिकल कैंप के नाम पर धोखाधड़ी का खेल
बताया जा रहा है कि 19 अप्रैल को केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने एक संदिग्ध मेडिकल कैंप पर छापा मारा, जहां इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। आरोपी छात्राओं को दिल्ली एम्स में आयोजित होने वाली कथित कॉन्फ्रेंस का झांसा देता था। जब प्रशासन ने इसकी सच्चाई जांची, तो पता चला कि ऐसी कोई कॉन्फ्रेंस आयोजित ही नहीं की जा रही थी।
फर्जी संस्था और लालच का जाल
हस्साम अहमद ने ‘कार्डियो सेवा संस्थान’ नाम से एक नकली संस्था बना रखी थी। इस नेटवर्क में शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय थी, जिसमें कुछ लोगों को खास तौर पर हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने का काम सौंपा गया था। लड़कियों को जोड़ने के बदले ‘पैसे’ और ‘जन्नत’ जैसे लालच दिए जाते थे, जिससे उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया जा सके।
फर्जी दस्तावेज और हस्ताक्षर का इस्तेमाल
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने केजीएमयू के अधिकारियों के नकली हस्ताक्षर वाले पत्र तैयार किए थे, जिनके जरिए छात्राओं को भरोसा दिलाया जाता था। इन दस्तावेजों में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल थे, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है। प्रशासन का कहना है कि इस गिरोह का उद्देश्य छात्राओं को भ्रमित कर उनका शोषण करना था।
पुलिस जांच जारी
इस मामले में पहले भी संदिग्ध गतिविधियों को लेकर कुछ आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। अब पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल, पुलिस सभी कड़ियों को जोड़कर पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने में जुटी है।
















































