UP: रायबरेली पुलिस ने बुधवार सुबह एक बड़े बच्चा चोरी गिरोह का खुलासा करते हुए नौ लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के निवासी शामिल हैं। गिरोह में तीन महिलाएं भी शामिल थीं। पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी किया गया नौ माह का मासूम बच्चा बरामद किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह चोरी किए गए बच्चों को ढाई से तीन लाख रुपये में बेचता था।
रेलवे स्टेशन के पास हुई गिरफ्तारी
पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि जिले में बच्चा चोरी करने वाले गिरोह के सक्रिय होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सीओ सदर अरुण कुमार नौहवार, कोतवाली प्रभारी शिवशंकर सिंह और त्रिपुला चौकी प्रभारी अंकुर दुबे की टीम ने बुधवार सुबह रेलवे स्टेशन के पास छापेमारी कर गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार लोगों में बिहार के अररिया निवासी रामकुमार दास और उसकी पत्नी रेशमा देवी, उत्तराखंड के उधम सिंह नगर निवासी किरणजीत उर्फ सरदार आंटी समेत यूपी के रामपुर, मुरादाबाद और अमरोहा जिलों के कई लोग शामिल हैं।
दिल्ली से लौट रही महिला का बच्चा किया था चोरी
जांच में पता चला कि मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ की रहने वाली सुहागवती अपने पति से नाराज होकर दिल्ली से लखनऊ आई थीं। वहां से वह अपने दो बच्चों के साथ त्रिवेणी एक्सप्रेस से मायके सिंगरौली जा रही थीं। रायबरेली रेलवे स्टेशन पर गिरोह के सदस्य महिला और उसके बच्चों को बहाने से एक भोजनालय में ले गए। इसी दौरान नौ माह के बच्चे को चोरी कर फरार हो गए। महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया।
बच्चों को बेचने का था संगठित नेटवर्क
पुलिस के अनुसार यह एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह था, जो अस्पतालों, गांवों और कस्बों में सक्रिय आशा बहुओं और अन्य लोगों के माध्यम से ऐसे परिवारों की जानकारी जुटाता था जिन्हें संतान की जरूरत होती थी। गिरोह के सदस्य फिर नवजात बच्चों की व्यवस्था करने के लिए सक्रिय हो जाते थे। रामकुमार दास और उसकी पत्नी रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और सार्वजनिक स्थानों पर अकेली महिलाओं को निशाना बनाते थे। जान-पहचान बढ़ाने के बाद मौका पाकर बच्चों का अपहरण कर लेते थे।
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बच्चा बिकने पर दंपती को मिलता था आधा हिस्सा
जांच में यह भी सामने आया कि चोरी किए गए बच्चे को बेचने पर सबसे बड़ा हिस्सा बच्चे चुराने वाले दंपती को मिलता था। बाकी रकम गिरोह के अन्य सदस्यों में बांटी जाती थी।
सात बच्चों की चोरी का खुलासा
पुलिस की जांच में पता चला है कि गिरोह पिछले सात से आठ महीनों से बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में सक्रिय था। अब तक सात बच्चों के चोरी होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से एक बच्चे को बरामद कर लिया गया है, जबकि बाकी छह बच्चों की तलाश जारी है।
पुलिस टीम को मिलेगा इनाम
गिरोह का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम को एसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी किए गए बाकी बच्चों को किन लोगों को बेचा गया।









































