लखनऊ: KGMU (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के बजट से हुए कथित दवा घोटाले की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। पांच सदस्यीय जांच समिति की लगभग 700 पन्नों की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सामान्य मूत्र रोगों और गुर्दे की पथरी से पीड़ित मरीजों के नाम पर लाखों रुपये की कैंसर संबंधी महंगी दवाएं खरीदी गईं। प्रारंभिक जांच में करीब ढाई करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले की आशंका जताई गई है।
मरीजों की पहचान का गलत इस्तेमाल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक कई मरीजों के यूएचआईडी नंबर और असाध्य योजना कार्ड का दुरुपयोग किया गया। मरीजों के नाम पर हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) स्टोर से महंगी दवाएं जारी कराई गईं और उनका भुगतान भी सरकारी योजनाओं के माध्यम से किया गया। समिति को आशंका है कि इन दवाओं को बाद में अवैध रूप से बाजार में बेच दिया गया।
पथरी और किडनी रोगियों के नाम पर मंगाई गईं कैंसर की दवाएं
जांच के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए जिनमें किडनी, प्रोस्टेट और पथरी जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के नाम पर कैंसर की दवाएं खरीदी गईं। दस्तावेजों में इन दवाओं को मरीजों को दिए जाने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया, जबकि जांचकर्ताओं को संकेत मिले हैं कि दवाएं निजी मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाई गईं। अब समिति दवाओं की खरीद, वितरण और बिक्री की पूरी श्रृंखला की पड़ताल कर रही है।
Also Read: मृत मरीजों के नाम पर कैंसर दवाएं बेचीं! KGMU में 2 करोड़ से ज्यादा का घोटाला, मचा हड़कंप
मृत मरीज के नाम पर भी जारी होती रहीं दवाएं
रिपोर्ट में हरदोई की एक महिला मरीज का मामला भी सामने आया है, जिसकी दोनों किडनियां खराब होने के कारण डायलिसिस चल रही थी। आरोप है कि मरीज की मृत्यु के बाद भी उसके नाम पर कई महीनों तक कैंसर की दवाएं जारी की जाती रहीं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि करोड़ों रुपये की दवाएं आखिर कहां खपाई गईं और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग शामिल थे।
सात कैंसर विभागों का होगा विशेष ऑडिट
मामले के सामने आने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने संस्थान के उन सभी सात विभागों का विस्तृत ऑडिट कराने का निर्णय लिया है, जहां कैंसर मरीजों का उपचार और कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। पांच हजार रुपये से अधिक कीमत वाली दवाओं के बिल, वाउचर और वितरण रिकॉर्ड की विशेष जांच की जाएगी। साथ ही पिछले पांच महीनों में सरकारी योजनाओं के तहत इलाज पाने वाले मरीजों के दस्तावेज भी खंगाले जाएंगे।
तीन कर्मचारी बर्खास्त, वसूली की कार्रवाई शुरू
केजीएमयू के प्रवक्ता Dr. K.K. Singh के अनुसार पूरे मामले की जांच के लिए गठित समिति महंगी कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी दवाओं से जुड़े रिकॉर्ड की अलग से समीक्षा करेगी। फिलहाल यूरोलॉजी विभाग के तीन कर्मचारियों को सेवा से हटाया जा चुका है और संबंधित एजेंसी से धनवसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन का दावा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
















































