लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में कैंसर मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली महंगी दवाओं के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों के नाम पर जारी की जाने वाली दवाओं को अवैध रूप से बाजार में बेच दिया जाता था। शुरुआती जांच में इस घोटाले की रकम दो करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है, जिससे संस्थान में हड़कंप मच गया है।
बजट में असामान्य बढ़ोतरी से खुली पोल
मामले का खुलासा तब हुआ जब यूरोलॉजी विभाग में दवाओं के खर्च और बजट में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस पर प्रशासन ने जांच शुरू कराई। जांच समिति के अध्यक्ष डॉ. के.के. सिंह के अनुसार, प्रारंभिक जांच में विभाग से जुड़े कुछ संविदाकर्मियों, एक मुख्य फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। आरोपियों ने मरीजों के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से महंगी कैंसर दवाएं जारी कराईं।
मृत और गैर-कैंसर मरीजों के नाम पर जारी हुई दवाएं
जांच में सामने आया कि आरोपी कंप्यूटर रिकॉर्ड से मरीजों की सूची निकालते थे और किडनी रोगियों या मृत मरीजों के नाम पर कैंसर की महंगी दवा ‘निवोलुमैब’ (Nivolumab) जारी कराते थे। इस दवा की कीमत एक से डेढ़ लाख रुपये तक होती है। बाद में इन दवाओं को बाजार में बेच दिया जाता था। जब मरीजों का सत्यापन किया गया तो कई ऐसे नाम सामने आए जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, जबकि कुछ मरीजों को कैंसर था ही नहीं।
प्रशासन ने शुरू की कड़ी कार्रवाई
घोटाले की जानकारी मिलते ही केजीएमयू प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। तीन संविदाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही संविदा कर्मचारियों को उपलब्ध कराने वाली एजेंसी से भी वसूली की तैयारी की जा रही है। मुख्य फार्मासिस्ट अरशद वसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है और उन्हें निलंबित कर दिया गया है। वहीं अंतरिम जांच रिपोर्ट के आधार पर यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष को भी पद से हटा दिया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर उठे सवाल
संस्थान में सुरक्षा और दवा वितरण व्यवस्था पर भारी खर्च किए जाने के बावजूद इतने बड़े घोटाले का सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निगरानी तंत्र की कमजोरियों का फायदा उठाकर लंबे समय से यह खेल चल रहा था। अब केजीएमयू प्रशासन दवा वितरण प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए सुरक्षा उपायों पर काम कर रहा है।














































