लखनऊ अग्निकांड: अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित तीन मंजिला इमारत में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। इस हादसे में 14 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 6 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद इमारत के निर्माण, स्वामित्व और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े पुराने दस्तावेज सामने आने लगे हैं, जिनसे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
1980 में आवंटित हुआ था भवन, कई बार बदला मालिकाना हक
भवन संख्या एमएस/102/डी मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत रामेश्वर सहाय के पुत्र विजय कुमार को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था। वर्ष 2005 में यह संपत्ति विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुई। बाद में 19 जनवरी 2013 को इसे वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला ने खरीद लिया। अगस्त 2014 में एलडीए ने नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की और लगभग 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया।
2016 में जारी हुआ ध्वस्तीकरण आदेश, दो महीने बाद ही हुआ निरस्त
जांच में सामने आया कि भवन में अनधिकृत निर्माण किए जाने पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने वर्ष 2016 में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद 10 मई 2016 को अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश भी पारित हुआ, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि महज दो महीने बाद 5 जुलाई 2016 को यह आदेश रद्द कर दिया गया। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके दबाव या निर्देश पर कार्रवाई को रोक दिया गया।
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12 वर्षों तक चलता रहा अवैध निर्माण, 30 अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कथित अवैध निर्माण वर्षों तक बिना किसी बाधा के संचालित होता रहा और इमारत में व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहीं। इस दौरान कई शिकायतें और प्रशासनिक फाइलें भी चलीं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। एलडीए अब वर्ष 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में तैनात रहे करीब 30 अधिकारियों, इंजीनियरों और जोनल अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रहा है।
अग्निकांड के बाद एलडीए सख्त, हजारों भवनों पर कार्रवाई की तैयारी
हादसे के बाद एलडीए ने शहर में रिहायशी भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। करीब 1000 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से 258 मामलों का निस्तारण हो चुका है। वहीं लगभग 1500 इमारतों के खिलाफ पहले से लंबित ध्वस्तीकरण आदेशों को अमल में लाने के लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है। एलडीए की रिपोर्ट विशेष जांच दल (एसआईटी) को भी सौंपी जाएगी।
शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका, चार आरोपी गिरफ्तार
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इमारत के बेसमेंट में पालतू जानवर रखे गए थे, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक संचालित हो रहा था। प्रथम तल पर दुकान का सामान रखा गया था, जहां से शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और गंभीर घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, जबकि पुलिस ने इमारत मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।












































