‘FIR के बिना SIT बिना तीर की कमान है…’, राम मंदिर चढ़ावा चोरी घोटाले पर अखिलेश यादव का सरकार पर तंज

UP: राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार सरकार और जांच एजेंसियों पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने मामले में सामने आ रही नई जानकारियों के बीच अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मुद्दे पर पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

‘कागभुसुंडि’ के गायब होने का भी उठाया मुद्दा

अखिलेश यादव ने दावा किया कि अब दान में दी गई ‘कागभुसुंडि’ के गायब होने की खबर सामने आई है, जो बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि लगातार चढ़ावा, चंदा और दान से जुड़े मामलों का खुलासा हो रहा है, जिससे सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने आरोपियों के संभावित फरार होने की आशंका जताते हुए नेपाल समेत सीमावर्ती इलाकों पर निगरानी बढ़ाने की बात कही।

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एसआईटी की भूमिका पर खड़े किए सवाल

सपा प्रमुख ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिना एफआईआर के गठित एसआईटी ‘बिना तीर की कमान’ जैसी है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि जब रोज नए खुलासे हो रहे हैं तो ऐसी स्थिति में एसआईटी जांच से क्या हासिल होगा। उनके मुताबिक यह जांच वास्तविक कार्रवाई से अधिक मामले को ढकने या बांटने का प्रयास प्रतीत होती है।

प्राथमिक रिपोर्ट में कई विसंगतियों का जिक्र

दूसरी ओर, राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में कई स्तरों पर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। जांच में सामने आया कि प्रति श्रद्धालु औसतन 15 से 18 रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है। हालांकि, सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं को आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि इनके दान से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके।

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हर महीने लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं रामलला के दरबार

एसआईटी की जांच के अनुसार अयोध्या स्थित राम मंदिर में हर महीने औसतन 25 लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं महाकुंभ के दौरान यह संख्या बढ़कर करीब एक करोड़ तक पहुंच गई थी। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बने इस मंदिर में आने वाले चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर उठे सवाल अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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