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जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों पर कार्रवाई शुरू, 170 को भेजा गया डिटेंशन सेंटर

Jammu kashmir rohingya muslims

केंद्र सरकार के निर्देश पर जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में अवैध रूप से बसे रोहिंग्याओं (Rohingya Muslims) पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने शनिवार को इन रोहिंग्याओं की बायोमिट्रिक जानकारी समेत अन्य डिटेल जुटाया। इसके बाद इन्हें जम्मू से हटाकर कठुआ के हीरानगर सब जेल में बने डिटेंशन सेंटर (होल्डिंग सेंटर) में रखा गया है। पहले चरण में 4 बसों में करीब 170 रोहिंग्या मुसलमानों को जम्मू से हीरानगर भेजा गया।


इससे पहले जम्मू के एमए स्टेडियम में 300 रोहिंग्याओं का वेरिफिकेशन और कोरोना टेस्ट किया गया। सांबा जिले के बाड़ी ब्राह्मणा के तेली बस्ती से भी 24 रोहिग्याओं का एमए स्टेडियम में वेरिफिकेशन किया गया। । इनका बायोमीट्रिक लेने के साथ ही परिवार में सदस्यों की संख्या, कब यहां आए, यहां रहने के लिए क्या-क्या दस्तावेज इनके पास हैं आदि की जानकारी जुटाई गई। सभी के फिंगर प्रिंट लिए गए।


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कोरोना टेस्ट में दो रोहिंग्याओं के पीड़ित होने की पुष्टि के बाद उन्हें गांधीनगर अस्पताल भेजा गया। सभी के बायोमीट्रिक और अन्य जानकारियां लेने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस की बसों में रोहिंग्याओं को हीरानगर शिफ्ट करने की कवायद रात तक जारी रही। वहीं, रोहिंग्याओं को डिटेंशन सेंटर में भेजे जाने के दौरान कठुआ जिले में सुरक्षा प्रबंध और भी बढ़ा दिए गए हैं। विभिन्न थानों में पुलिसकर्मियों की तैनाती को भी बढ़ा दिया गया है। हीरानगर सब जेल की सुरक्षा को कड़ा कर दिया गया है।


म्यांमार के नागरिक अब्दुल हनान ने पत्रकारों को बताया कि कोविड-19 की जांच के बाद हमने एक फॉर्म भरा। हमारे फिंगरप्रिंट लिए गए। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह स्टेडियम से बाहर आ गए। इस बीच कुछ राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने केन्द्र सरकार से अनुरोध किया है कि वे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को तुरंत उनके देश वापस भेजने की दिशा में कदम उठाएं। उनका आरोप है कि इन दोनों की देश में उपस्थिति क्षेत्र की ‘जनांकीकीय प्रकृति को बदलने की साजिश’ और क्षेत्र की शांति के लिए खतरा है।


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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 6523 रोहिंग्या रहते हैं। इनमें 6461 जम्मू संभाग और 62 कश्मीर में हैं। लद्दाख में भी ये अस्थायी आशियाने बनाकर रह रहे हैं। हालांकि, 13600 विदेशी नागरिक जिसमें रोहिंग्या और बांग्लादेशी शामिल हैं, यहां रहते हैं। इनके अस्थायी ठिकाने जम्मू-कश्मीर के पांच जिलों जम्मू, सांबा, डोडा, पुंछ व अनंतनाग में हैं। जम्मू जिले में ही रोहिंग्याओं के 30 स्थानों पर ठिकाने हैं। मार्च 2017 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इनका डाटा बेस तैयार करने को कहा था। अब नए सिरे से इन्हें चिह्नित किया जा रहा है।


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