‘डीएम और नगर निगम जवाब दें…’, लखनऊ अग्निकांड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त

लखनऊ अग्निकांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने विकासनगर क्षेत्र में हाल ही में जली लगभग 1200 झुग्गियों के मामले को गंभीरता से लिया है। जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने जिलाधिकारी और नगर निगम से 30 मई तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और मुख्य अग्निशमन अधिकारी से भी स्थिति पर रिपोर्ट तलब की गई है।

अतिक्रमण और सुविधाओं पर कोर्ट के तीखे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से सवाल किया कि पिछले करीब 20 वर्षों में पीडब्ल्यूडी की लगभग चार बीघा जमीन पर करीब 1455 लोग कैसे बस गए। कोर्ट ने यह भी पूछा कि इन झुग्गीवासियों तक बिजली और रसोई गैस के कनेक्शन किन माध्यमों से पहुंचे और इतने लंबे समय तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

अग्निकांड पीड़ितों के लिए तत्काल राहत के निर्देश

न्यायालय ने हालिया अग्निकांड को देखते हुए प्रशासन को प्रभावित लोगों के लिए तुरंत राहत सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों को भोजन, अस्थायी आवास और समुचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे इस संकट की घड़ी में बेसहारा न रहें।

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सरकारी एजेंसियों को पक्षकार बनाने और जांच के संकेत

अदालत ने पीडब्ल्यूडी विभाग और राज्य के राहत आयुक्त को भी इस मामले में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संकेत दिया गया है कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा न होने पाए।

आग की भयावह घटना और उसके बाद की स्थिति

15 अप्रैल को विकासनगर में लगी भीषण आग ने करीब 1200 झोपड़ियों को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। आग के दौरान 100 से अधिक एलपीजी सिलेंडर फटने से स्थिति और भयावह हो गई, जबकि धुआं कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया। राहत कार्य के लिए दमकल की 20 गाड़ियों ने करीब 5 घंटे में आग पर काबू पाया। हादसे के बाद दो मासूम बच्चों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय स्थलों में स्थानांतरित कर दिया गया है और सरकार ने मुआवजे की घोषणा की है।

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