30 जून तक बाढ़ राहत चौपालें आयोजित होंगी, 24 घंटे सक्रिय रहेगा बाढ़ नियंत्रण कक्ष

फर्रुखाबाद। मानसून के आगमन और संभावित बाढ़ की चुनौतियों को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में सभी विभागों को बाढ़ से निपटने की तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नागरिकों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, सिंचाई, लोक निर्माण, विद्युत, पंचायती राज, आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया और अपनी-अपनी तैयारियों की जानकारी दी। जिलाधिकारी ने कहा कि संभावित बाढ़ की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए सभी विभाग समन्वित कार्ययोजना के अनुसार कार्य करें तथा आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित कर लें।

उन्होंने निर्देश दिए कि राहत सामग्री, खाद्य पैकेट, लाइफ जैकेट, नाव, तटबंध सुरक्षा सामग्री तथा अन्य जरूरी उपकरणों का पर्याप्त भंडारण किया जाए। साथ ही इन संसाधनों का नियमित सत्यापन और रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए ताकि आपदा की स्थिति में तत्काल उनका उपयोग किया जा सके।

रात्रिकालीन बचाव कार्यों पर विशेष जोर

जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रात के समय राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पर्याप्त संख्या में सर्च लाइट, नाव और अन्य तकनीकी उपकरण तैयार रखे जाएं। उन्होंने कहा कि आपदा के समय त्वरित कार्रवाई ही जनहानि और संपत्ति के नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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24×7 सक्रिय रहेगा बाढ़ नियंत्रण कक्ष

बैठक में जनपद स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम को चौबीसों घंटे सक्रिय रखा जाए। प्राप्त होने वाली प्रत्येक सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा नियंत्रण कक्ष और क्षेत्रीय अधिकारियों के बीच सतत संपर्क एवं समन्वय बना रहे।

संवेदनशील क्षेत्रों में स्थापित होंगी बाढ़ चौकियां

संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील क्षेत्रों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने बाढ़ चौकियों की स्थापना और उनके प्रभावी संचालन के निर्देश दिए। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर अस्थायी बाढ़ शरणालयों को तत्काल सक्रिय करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि शरणालयों में भोजन, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध रहें।

30 जून तक लगेंगी बाढ़ राहत चौपालें

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों में 30 जून तक बाढ़ राहत चौपालों का आयोजन पूरा कर लिया जाए। इन चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों को बाढ़ के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं तथा प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही ग्रामीणों की समस्याओं और सुझावों को भी संकलित किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग को विशेष तैयारी के निर्देश

स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिक उपचार सामग्री, आवश्यक दवाइयों, एम्बुलेंस सेवाओं एवं चिकित्सकीय टीमों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने जलजनित एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने तथा प्रभावित क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश भी दिए।

वैकल्पिक यातायात और मूलभूत सुविधाओं पर रहेगा फोकस

लोक निर्माण विभाग को संभावित रूप से प्रभावित मार्गों की पहचान कर वैकल्पिक यातायात व्यवस्था और रूट डायवर्जन की तैयारी पहले से करने के निर्देश दिए गए। वहीं पेयजल, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में भी जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं तैयार रखी जाएं।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने सभी विभागों को नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करने, समन्वय बैठकों को निरंतर जारी रखने तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बाढ़ सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन की जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पूर्व तैयारी, सतर्कता और बेहतर समन्वय के माध्यम से किसी भी संभावित आपदा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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