‘कान खोलकर सुन लो, मुकदमों से डरने वाली नहीं…’, FIR दर्ज होने के बाद भड़की सपा सांसद इकरा हसन

इकरा हसन ने सहारनपुर में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह गरीबों, पीड़ितों और इंसाफ की लड़ाई लड़ती रहेंगी और किसी भी मुकदमे से डरने वाली नहीं हैं। इकरा ने प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें कानूनी कार्रवाई के जरिए दबाने की कोशिश की जाएगी तो वह और मजबूती से आवाज उठाएंगी।

डीआईजी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के बाद कार्रवाई

सहारनपुर पुलिस ने 21 मई को इकरा हसन, पूर्व मंत्री मांगेराम कश्यप और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में मामला दर्ज किया। यह कार्रवाई शामली के जसाला गांव में हुई मोनू कश्यप हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर डीआईजी कार्यालय के बाहर हुए धरने और हंगामे के बाद की गई। बताया जा रहा है कि इकरा हसन पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मामले में सख्त धाराओं में कार्रवाई की मांग को लेकर वहां पहुंची थीं।

Also Read: UP: कैराना सांसद इकरा हसन पुलिस हिरासत में, DIG ऑफिस के बाहर जमकर हंगामा!

पुलिस और सांसद के बीच हुई तीखी नोकझोंक

धरने के दौरान इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। सांसद का आरोप है कि प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया और पीड़ित मां के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि जब तक परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने इकरा हसन को कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया। वहीं पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के कारण सरकारी कार्य प्रभावित हुआ और जाम जैसी स्थिति बन गई थी।

अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार को दी आर्थिक सहायता

इस बीच इकरा हसन मृतक मोनू कश्यप की मां विमलेश देवी को लेकर अखिलेश यादव और डिंपल यादव से मिलने पहुंचीं। परिजनों के अनुसार, अखिलेश यादव ने परिवार को सांत्वना देते हुए दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा। मोनू कश्यप हत्याकांड को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। विरोध में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर जाम लगाया गया और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की गई।

Also Read: अपनी बेटियों को दहेज़ कम दें, लेकिन शिक्षा ज़रूर दें” : सपा सांसद इकरा हसन का समाज को मजबूत संदेश, वायरल हो रहा बयान!

कश्यप समाज में नाराजगी

घटना के बाद कश्यप समाज में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। समाज के लोगों का कहना है कि जो जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की कोशिश कर रही थीं, उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जो उचित नहीं है।

(देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं.)