आजमगढ़। नौकरी के झांसे में फंसकर रूस गए आजमगढ़ और मऊ जिले के कई युवक रूस-यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ गए। दो साल बाद अजहरुद्दीन खान और रामचंद्र का शव ताबूत में घर पहुंचा तो गांव में मातम छा गया। एजेंटों ने गार्ड की नौकरी का लालच देकर उन्हें जबरन युद्ध में धकेल दिया।
एजेंटों के जाल में फंसे युवक
जनवरी 2024 में आजमगढ़ और मऊ जिले के कई युवक बेहतर नौकरी की तलाश में एजेंटों के चंगुल में फंस गए। मऊ के एजेंट विनोद यादव, सुमित और दुष्यंत ने उन्हें गार्ड और हेल्पर की नौकरी का लालच दिया। 15 जनवरी 2024 को ये युवक एजेंटों के साथ रूस रवाना हुए, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें जबरन ट्रेनिंग देकर रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया और यूक्रेन बॉर्डर पर युद्ध में झोंक दिया गया।
पहले भी हो चुकी है कई मौतें
इससे पहले आजमगढ़ के कन्हैया यादव तथा मऊ के श्यामसुंदर और सुनील यादव की रूस-यूक्रेन युद्ध में मौत हो चुकी है। वहीं आजमगढ़ के राकेश यादव और मऊ के बृजेश यादव घायल अवस्था में घर लौट आए। लेकिन विनोद यादव, जोगेंद्र यादव, अरविंद यादव, रामचंद्र, अजहरुद्दीन खान, हुमेश्वर प्रसाद, दीपक, धीरेंद्र कुमार समेत कई युवक अभी भी लापता हैं।
खोजापुर माधवपट्टी के योगेंद्र यादव भी लापता
कंधरापुर थाना क्षेत्र के खोजापुर माधवपट्टी निवासी योगेंद्र यादव भी इसी गिरोह के साथ रूस गए थे। परिजनों का आरोप है कि मऊ के एजेंट विनोद यादव ने सभी को फंसाया। गार्ड की नौकरी बताकर उन्हें सीधे युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया।
अजहरुद्दीन खान की दो साल तक चली तलाश
आजमगढ़ शहर के गुलामी का पूरा निवासी अजहरुद्दीन खान को 27 जनवरी 2024 को एजेंट विनोद यादव अपने साथ ले गया था। लापता होने के बाद उनके भाई अजीमुद्दीन ने सऊदी अरब की नौकरी छोड़कर भाई की तलाश में भारत-रूस दौड़ लगाई। एंबेसी से लेकर रूसी अधिकारियों तक संपर्क किया। मीडिया में मामले के प्रमुखता से आने के बाद भारत सरकार सक्रिय हुई और जांच शुरू हुई।
दो साल बाद लौटा शव, गांव में पसरा मातम
लंबी मशक्कत और सरकार की मदद से अजहरुद्दीन खान तथा आराजी देवारा करखिया निवासी रामचंद्र का शव दो साल बाद वाराणसी पहुंचा। तहसीलदार सगड़ी विवेकानंद ने वाराणसी एयरपोर्ट पर शव प्राप्त किए और इन्हें परिजनों को सौंपा। दोनों शवों के पहुंचते ही गांव में कोहराम मच गया। परिजन फफक-फफक कर रो पड़े।
परिजनों की मांग
अजहरुद्दीन के भाई अजीमुद्दीन ने बताया कि वे दो साल से भाई की तलाश में भटक रहे थे। अजहरुद्दीन के जीजा अबू बकर ने इसे बड़ा स्कैम बताया और कहा कि एजेंसी संचालकों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि मृतकों की बकाया सैलरी और अन्य देय राशि परिवारों को दिलाई जाए।
प्रशासन की भूमिका
प्रशासन ने दोनों शवों को वाराणसी एयरपोर्ट से लाकर परिजनों के सुपुर्द करने की पूरी जिम्मेदारी तहसीलदार सगड़ी को सौंपी थी। तहसीलदार ने एयरपोर्ट पर सभी औपचारिकताएं पूरी कर शव परिजनों को सौंपे। यह घटना उन सैकड़ों युवकों की दर्दनाक कहानी को उजागर करती है जो बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश गए लेकिन नौकरी के नाम पर युद्ध की आग में झोंक दिए गए। परिजन अब लापता अन्य युवकों की सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं।












































