गोरखपुर। गोरखपुर जिले के गगहा, जंगल कौड़िया, कौड़ीराम, खजनी एवं पाली ब्लॉकों के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के लिए मंगलवार को आउटब्रेक प्रोन सिंड्रोम एवं जूनोटिक रोगों पर एक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर रोगों की शीघ्र पहचान, समयबद्ध रिपोर्टिंग तथा प्रभावी रोग निगरानी को सुदृढ़ बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान सीएमओ डॉ राजेश झा ने सीएचओ को महत्वपूर्ण निर्देश दिये।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रकोप की आशंका वाली बीमारियों की पहचान, रोग निगरानी प्रणाली, प्रकोप की स्थिति में त्वरित कार्रवाई तथा प्रमुख पशुजन्य (जूनोटिक) रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही, ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण पर विशेष चर्चा की गई, जिसके अंतर्गत मानव, पशु एवं पर्यावरण स्वास्थ्य क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित कर रोगों की रोकथाम और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी गोरखपुर डॉ राजेश झा ने कहा कि संक्रामक एवं पशुजन्य रोगों की समय रहते पहचान और उनकी सटीक रिपोर्टिंग जनस्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की अग्रिम पंक्ति में कार्य करते हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उनकी क्षमता वृद्धि के साथ-साथ जिले की रोग निगरानी प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ झा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग रोगों की रोकथाम, नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सामुदायिक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों की पहचान करने एवं उनके प्रति प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए आवश्यक तकनीकी और व्यावहारिक जानकारियां भी उपलब्ध कराई गईं। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से जिले में रोग निगरानी व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी तथा संभावित प्रकोपों से निपटने की क्षमता में वृद्धि होगी।
इस अवसर पर जिला सर्विलांस अधिकारी और डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय सहित संबंधित ब्लॉकों के अधिकारी व सीएचओ भी वर्चुअल प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए।
















































