उत्तर प्रदेश एटीएस की जांच में एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ है, जिसमें पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी का नाम सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार संदिग्ध दानियाल अशरफ और कृष्णा मिश्रा को पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों पर हमला करने के लिए उकसाया गया था। इसके बदले उन्हें एक लाख रुपये देने का लालच भी दिया गया था। दोनों आरोपितों ने उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई संवेदनशील ठिकानों की रेकी की थी।
इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब के जरिए बने संपर्क
एटीएस ने 23 अप्रैल को नोएडा से समीर खान और तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला खान को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया कि दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब के माध्यम से पाकिस्तानी गैंगस्टर के संपर्क में आए थे। उन्हें भारत में स्लीपर सेल तैयार करने और संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाने का काम सौंपा गया था।
ऑनलाइन दी गई आतंकी ट्रेनिंग
जांच में यह भी पता चला कि पाकिस्तानी नेटवर्क द्वारा आरोपितों को ऑनलाइन हैंड ग्रेनेड हमलों की ट्रेनिंग दी गई थी। एटीएस टीम जब दोनों को आगे की पूछताछ के लिए नोएडा लेकर गई, तब उन्होंने कई अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि कुछ अन्य युवकों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया था, जो कथित तौर पर आईएसआई एजेंटों के संपर्क में काम कर रहे थे।
स्लीपर सेल से जुड़े नए नाम आए सामने
ऑनलाइन चैट और संदिग्ध लिंक की जांच के दौरान एटीएस को बाराबंकी निवासी दानियाल अशरफ और कुशीनगर निवासी कृष्णा मिश्रा के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद दोनों को अलग-अलग दिनों में गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों ने कई पुलिस थानों और सुरक्षा एजेंसियों के ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर पाकिस्तानी गैंगस्टर तक पहुंचाए थे।
मोबाइल फोन से मिले अहम सबूत
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों के मोबाइल फोन से कई संवेदनशील स्थानों की फोटो और वीडियो बरामद हुई हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल भविष्य में आतंकी हमलों की योजना बनाने के लिए किया जा सकता था। यह भी सामने आया है कि दोनों को जल्द ही हैंड ग्रेनेड उपलब्ध कराए जाने की तैयारी थी।
पंजाब हमले से भी जुड़ रहे तार
हाल ही में पंजाब में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी भी कथित तौर पर पाकिस्तानी गैंगस्टर द्वारा ली गई थी। अब एटीएस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि गिरफ्तार संदिग्धों के स्लीपर सेल का उस हमले से कोई संबंध था या नहीं। एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में लगातार छापेमारी और डिजिटल जांच कर रही हैं।








































