बरेली : पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के चलते उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए जिला प्रशासन ने यूरिया और डीएपी खाद की बिक्री को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से प्रशासन ने अब खाद वितरण पूरी तरह अधिकारियों की निगरानी में कराने का निर्णय लिया है।
जारी निर्देशों के अनुसार किसानों को अब उनकी भूमि के आधार पर ही खाद उपलब्ध कराई जाएगी। एक हेक्टेयर भूमि वाले किसानों को अधिकतम 7 बोरी यूरिया और 5 बोरी डीएपी देने की सीमा तय की गई है। इससे बड़े किसानों द्वारा अधिक मात्रा में खाद खरीदकर भंडारण करने और छोटे किसानों को होने वाली परेशानी पर रोक लगेगी।
प्रशासन ने वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष समितियों का गठन किया है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। ग्रामीण इलाकों में एसडीएम, बीडीओ और एडीओ पंचायत को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि जिला कृषि अधिकारी और उपनिदेशक कृषि पूरे वितरण तंत्र की मॉनिटरिंग करेंगे।
इसके अलावा निजी खाद विक्रेताओं और सहकारी समितियों के सचिवों को भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, स्टॉक छिपाने या अधिक दाम पर बिक्री करने की शिकायत मिलने पर लाइसेंस निरस्तीकरण समेत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
प्रशासन का कहना है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में खाद आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, इसलिए समय रहते यह कदम उठाए गए हैं ताकि सभी किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जा सके और किसी को परेशानी का सामना न करना पड़े।











































