लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली कर्मचारियों में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के आदेश के बाद अब पावर कॉरपोरेशन कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के मामलों की जांच विजिलेंस विभाग करेगा।
पावर कॉरपोरेशन की सतर्कता इकाई की भूमिका सीमित
सरकार के नए फैसले के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन की अपनी सतर्कता इकाई अब केवल बिजली चोरी के मामलों तक सीमित रहेगी। भ्रष्टाचार, कदाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच विजिलेंस विभाग की जिम्मेदारी होगी।
पहले भी थी व्यवस्था, अब दोबारा लागू
यह व्यवस्था पहले भी लागू थी, जिसे अब फिर से सक्रिय कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे बिजली विभाग में भ्रष्टाचार पर सीधी और प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी।
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बिजली चोरी निरोधक थाने यथावत
प्रदेश भर में हर जिले में चल रहे बिजली चोरी निरोधक थाने एडीजी के अधीन यथावत रहेंगे। इन थानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केवल भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच अब विजिलेंस विभाग संभालेगा।
सरकार का साफ संदेश
यह फैसला ऊर्जा विभाग में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने की दिशा में सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति को दर्शाता है। ऊर्जा निगमों में लंबे समय से चली आ रही भ्रष्टाचार की शिकायतों को देखते हुए यह कदम अहम माना जा रहा है।









































