इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला कर दिया है। भारतीय समय के मुताबिक शनिवार सुबह तेहरान समेत कई शहरों में धमाके सुने गए हैं और हवाई हमलों के सायरन बज रहे हैं। इजराइल डिफेंस फोर्स ने ईरान पर हमले की जानकारी देते हुए इसे ‘प्रिवेंटिव अटैक’ बताया है। हमले के बाद ईरान ने सभी उड़ानें रोक दी हैं और एयरस्पेस खाली करा लिया है। इधर इजराइल में भी एयर अटैक सायरन सुनाई दे रहे हैं। संवेदनशील इलाके खाली कराए जा रहे हैं। लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है। वहीं अल जजीरा ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह अमेरिका और इजराइल का जॉइंट मिलिट्री एक्शन है।
इसके तहत ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के दफ्तर के पास हमला किया गया। हमले के बाद खामेनेई को सुरक्षित जगह शिफ्ट कर दिया गया है। इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने नए अभियान का नाम ‘लियोनस् रोर’ (शेर की दहाड़) रखा है। यह नाम इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तय किया है। बताया गया है कि सेना ने पहले इस हमले के लिए दूसरा नाम रखा था। बता दे यह हमला ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को लेकर चल रही बातचीत के बीच हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी। शुक्रवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत इजरायल छोड़ने के लिए कहा था।
अलजजीरा की मुताबिक इजरायली हमले में ईरान के मोबाइल नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया है। एक इज़रायली सिक्योरिटी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि इस ऑपरेशन की प्लानिंग महीनों पहले से थी और इसकी टाइमिंग कई हफ़्ते पहले तय हो गई थी। डिफेंस एस्टैब्लिशमेंट के सूत्रों ने बताया कि ‘शील्ड ऑफ़ जूडा’ नाम के इन हमलों का एक मकसद “इज़राइली होम फ्रंट के लिए खतरों को दूर करना होगा, जिसमें मिसाइल लॉन्चर और अनमैन्ड एरियल व्हीकल बेस पर ज़ोर दिया जाएगा।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी। अमेरिकी सेना पहले ही ईरान को चारों तरफ से घेर चुकी है। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत इजराइल छोड़ने के लिए कहा था। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है।
ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की।ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं।
ट्रम्प ने कहा है कि ईरान में अमेरिका का सैन्य ऑपरेशन बहुत बड़ा है और अभी भी चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद अमेरिका और उसके लोगों को खतरे से बचाना है। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइलों को तबाह करने और उसके मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद भी ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ने का ऑप्शन का कोई मौका नहीं अपनाया, इसलिए अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। ट्रम्प ने कहा है कि ईरान में चल रही सैन्य कार्रवाई के दौरान कुछ अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है। उन्होंने कहा कि युद्ध में जान का नुकसान हो सकता है, लेकिन यह कदम भविष्य की सुरक्षा के लिए उठाया जा रहा है।
इजराइल में भारतीय दूतावास ने कहा है कि वहां रह रहे सभी भारतीय सावधान और सतर्क रहें।
इजराइल की सरकार और होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करें।
अपने घर या ऑफिस के पास बने सुरक्षित शेल्टर (सुरक्षित जगह) की जानकारी रखें और उनके पास ही रहें।
अभी के लिए इजराइल के अंदर गैर-जरूरी यात्रा से बचें।
स्थानीय खबरें और सरकारी अलर्ट नियमित रूप से देखते रहें।
किसी भी आपात स्थिति में दूतावास की 24 घंटे हेल्पलाइन +972-54-7520711 पर संपर्क करें।
ईमेल के जरिए भी मदद ले सकते हैं-cons1.telaviv@mea.gov.inदूतावास स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर नई जानकारी जारी करेगा।
अमेरिका पहले ही मिडिल ईस्ट में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत तैनात कर चुका है। कई राउंड की डिप्लोमैटिक कोशिशों के बावजूद इजरायल और अमेरिका का कहना है कि ‘बातचीत का कोई रास्ता नहीं निकल पाया है।’ ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर को एक अज्ञात जगह पर छिपा दिया गया है। इजरायली सेना ने इमरजेंसी की घोषणा कर दी है और लोगों से शेल्टर के पास रहने को कहा है। इजरायली सेना ने कहा है कि “हम समझते हैं कि यह एक कैंपेन है जिसे इजरायल ने अपनी इस पॉलिसी के हिसाब से शुरू किया है कि ईरान इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा है।”
इजरायल में स्कूलों को बंद कर दिया गया है, लोगों के एक जगह पर जमा होने से मना कर दिया गया है और जरूरी सेक्टर्स छोड़कर गैर-जरूरी जगहों को बंद कर दिया है। इजरायली सेना ने कहा है कि ईरान के मिसाइल हमले की संभावना को देखते हुए एहतियातन ये कदम उठाए गये हैं। वहीं, कतर में US दूतावास ने ईरान पर इजरायली हमलों के बाद सभी कर्मचारियों के लिए शेल्टर-इन-प्लेस लागू कर दिया है। कतर में US एम्बेसी ने सभी कर्मचारियों के लिए शेल्टर-इन-प्लेस लागू किया है और अपने सभी नागरिकों को अगली सूचना तक ऐसा ही करने की सलाह दी है। यह कदम शनिवार को इज़राइल के ईरान पर हमला करने के बाद उठाया गया है।
INPUT-ANANYA MISHRA
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