उप निबंध कार्यालय में रजिस्ट्री कार्य ठप, फ्रंट ऑफिस व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं-दस्तावेज लेखकों का अनिश्चितकालीन धरना

सलेमपुर (देवरिया)। उप निबंध कार्यालय में प्रस्तावित फ्रंट ऑफिस व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इसके चलते कार्यालय में रजिस्ट्री सहित सभी कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

फ्रंट ऑफिस व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन

नगर स्थित उप निबंध कार्यालय पर धरना देते हुए दस्तावेज लेखक संघ सलेमपुर के अध्यक्ष गिरिजेश कुमार मिश्र ने कहा कि नई फ्रंट ऑफिस व्यवस्था लागू होने से दस्तावेज लेखकों और अधिवक्ताओं की आजीविका पर सीधा संकट आ जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था वर्षों से इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों के खिलाफ है और इससे उनके रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

“आजीविका पर संकट, कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप”

गिरिजेश कुमार मिश्र ने आगे कहा कि अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक आम जनता को कानूनी सहायता और दस्तावेजी सेवाएं प्रदान करते हैं। फ्रंट ऑफिस व्यवस्था लागू होने से उनके कार्यक्षेत्र में अनावश्यक हस्तक्षेप होगा और उनकी भूमिका सीमित हो जाएगी।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन व सरकार से मांग की है कि प्रस्तावित फ्रंट ऑफिस व्यवस्था को तुरंत वापस लिया जाए और उनके हितों की रक्षा की जाए।

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धरने में शामिल प्रमुख लोग

धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:

– मुकेश कुमार श्रीवास्तव
– विक्रांत सिंह
– रविंद्र शंकर उपाध्याय
– विकास पाल
– रामाशीष यादव
– रामाधार यादव
– जयराम तिवारी
– राजकुमार मिश्र
– राजू प्रजापति
– प्रमोद कुमार श्रीवास्तव
– अवधेश कुमार
– संजय प्रजापति
– संजय श्रीवास्तव
– विजय कुशवाहा

चेतावनी : मांग पूरी होने तक जारी रहेगा धरना

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें स्वीकार नहीं की जाती और फ्रंट ऑफिस व्यवस्था वापस नहीं ली जाती, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।

वर्तमान में उप निबंध कार्यालय के समीप धरना स्थल पर प्रदर्शन जारी है। आमजन को रजिस्ट्री कार्यों में हो रही देरी से काफी परेशानी हो रही है।

प्रशासन पर बढ़ रहा है दबाव

यह आंदोलन स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा में है। अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक वर्ग लंबे समय से इस व्यवस्था का विरोध कर रहे थे, जिसने अब अनिश्चितकालीन धरने का रूप ले लिया है।

प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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