अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि को लेकर जारी विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आगरा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यदि दान राशि में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो संबंधित लोग स्वयं आगे आकर स्थिति को सुधारें। इस दौरान उन्होंने हमला करते हुए कहा कि कैमरे बंद करके चढ़ावे की रकम वापस रख दी जाए, भगवान राम सभी को माफ कर देंगे।
जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े मामले में सरकारी अधिकारियों द्वारा संतों और धार्मिक व्यक्तियों की जांच कराना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, सनातन धर्म को आगे बढ़ाने वाले लोगों की प्रशासनिक स्तर पर जांच होना धार्मिक परंपराओं के लिहाज से चिंता का विषय है।
आपसी समाधान की दी सलाह
सपा प्रमुख ने कहा कि यदि वास्तव में भगवान राम को चढ़ाई गई राशि में कोई गड़बड़ी हुई है तो संबंधित पक्षों को आपस में बैठकर इसका समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के विवाद से श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित होती हैं और मामले का समाधान पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी साधा था निशाना
अखिलेश यादव इससे पहले सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने संकेतों में कहा था कि सच्चाई तक पहुंचने के लिए बहुत दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि जांच एजेंसियां दोषियों की पहचान नहीं कर पा रही हैं तो वह सहयोग के लिए तैयार हैं।
एसआईटी जांच और ट्रस्ट का पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि दान राशि का नियमित ऑडिट कराया जाता है और अब तक किसी भी वित्तीय अनियमितता के प्रमाण सामने नहीं आए हैं। विवाद उस समय और गहरा गया जब पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कथित अनियमितताओं की जानकारी होने का दावा किया और भाजपा नेता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ट्रस्ट की आय-व्यय का सार्वजनिक ब्यौरा जारी करने की मांग की।












































