संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में आज पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में घमासान देखने को मिला है। विदेश मंत्री की तरफ से सदन में पश्चिम एशिया में व्याप्त संकट पर बयान दिया गया। लेकिन इसके बाद से विपक्ष सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, ‘पश्चिम एशिया संकट से कितना नुकसान होगा? एक बड़े बदलाव की लड़ाई चल रही है। इससे हमारी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। आपने शेयर बाजार देखा। प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के साथ समझौता कर लिया है। देश को बड़ा झटका लगने वाला है। तो फिर इस पर चर्चा करने में उन्हें क्या दिक्कत है?’
राहुल गांधी ने आगे कहा कि, ‘हम इसके बाद दूसरे मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। क्या पश्चिम एशिया का मुद्दा महत्वपूर्ण नहीं है? ईंधन की कीमतें और आर्थिक तबाही चर्चा के महत्वपूर्ण विषय नहीं हैं? ये सार्वजनिक मुद्दे हैं। हम इन्हें महत्वपूर्ण मानते हैं और इन पर चर्चा करना चाहते हैं… लेकिन वे चर्चा नहीं करना चाहते क्योंकि इससे और भी बातें सामने आएंगी, प्रधानमंत्री की छवि खराब होगी। उनकी छवि खराब होगी और उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है, ये सब सामने आएगा। इसलिए वे चर्चा नहीं करना चाहते। आपने देखा कि प्रधानमंत्री संसद से कैसे भाग गए। मैं आपको बता रहा हूं, वे नहीं आ पाएंगे।’
वहीं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को एशिया के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में तेजी से बदल रही भू-राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह हालात केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। साथ ही भारत की वैश्विक छवि और सामर्थ्य पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 55 प्रतिशत जरूरतें पश्चिम एशिया से होने वाले आयात से पूरी करता है। यदि उस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो उसका सीधा असर हमारे देश की आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है। खरगे ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से कहा, ‘मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे यह मुद्दा उठाने का अवसर दिया।’ खरगे ने कहा कि वह नियम 176 के तहत तहत उभरती चुनौतियों के संदर्भ में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के विषय पर अल्पकालिक चर्चा की अनुमति का अनुरोध करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि एशिया के उस क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा और आजीविका वहां की स्थिरता पर निर्भर करती है। हाल की घटनाओं में कुछ भारतीय नागरिकों के मारे जाने या लापता होने की खबरें भी सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडर के दाम में लगभग 60 रुपये की बढ़ोतरी भी आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। भारत हर साल लगभग 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर का तेल आयात करता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और परिवारों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। इस बीच सभापति द्वारा नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बैठ जाने के लिए कहा गया। सभापति ने खरगे को बाद में बोलने का अवसर देने की बात कही और कहा कि फिलहाल विदेश मंत्री एस जयशंकर सदन में अपनी बात रखने जा रहे हैं। इस बार विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। हंगामे के बीच एस जयशंकर ने अपनी बात रखी। लेकिन विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे इसके उपरांत विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।
INPUT-ANANYA MISHRA













































