’30 लाख में ठेका और ‘कमांडो सर्जरी’ कोडवर्ड नेटवर्क…’, Kanpur Kidney Transplant Scam में बड़ा खुलासा

Kanpur Kidney Transplant Scam: कानपुर किडनी कांड में गिरफ्तार मास्टरमाइंड रोहित तिवारी (Rohit Tiwari) से पुलिस पूछताछ में बड़े खुलासे हुए हैं। उसने बताया कि वह हर किडनी ट्रांसप्लांट के बदले 25 से 30 लाख रुपये तक का ‘ठेका’ लेता था। इस पूरे अवैध नेटवर्क में डोनर और मरीज की व्यवस्था एजेंटों के जरिए की जाती थी, जबकि रोहित केवल ऑपरेशन और पैकेज फाइनल करता था। बातचीत छिपाने के लिए इस पूरे काम को कोडवर्ड में ‘कमांडो सर्जरी’ कहा जाता था।

साधारण नौकरी से अपराध तक का सफर

हरदोई के बिलग्राम गंगाधाम का रहने वाला रोहित 2008 में 12वीं पास करने के बाद बेरोजगार था। शुरुआत में उसने गाजियाबाद की एक केबल फैक्ट्री और बाद में कई कंपनियों में मजदूरी की। इसी दौरान उसकी मुलाकात कुछ लोगों से हुई, जो उसे मेरठ ले गए। वहीं उसकी जिंदगी का रुख बदल गया और वह धीरे-धीरे मेडिकल क्षेत्र में रिसेप्शनिस्ट और वार्ड बॉय की नौकरी करते हुए किडनी रैकेट से जुड़ गया।

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अस्पतालों में नेटवर्क और रैकेट का विस्तार

मेरठ के अल्फा अस्पताल और मधुकर क्लीनिक में काम करते हुए रोहित का संपर्क कई डॉक्टरों और एजेंटों से हुआ। 2019 में वह कानपुर पहुंचा और वहां अवैध ट्रांसप्लांट का नेटवर्क खड़ा करने लगा। उसने कानपुर, मेरठ, प्रयागराज, दिल्ली और अन्य शहरों में एजेंटों की टीम तैयार की। कल्याणपुर के कई निजी अस्पतालों में अवैध ट्रांसप्लांट कराए जाने की बात सामने आई है, जिनमें दर्जनों ऑपरेशन शामिल बताए गए हैं।

एजेंटों के जरिए चलता था पूरा खेल

पुलिस के अनुसार रोहित सीधे मरीजों से संपर्क नहीं करता था। उसके लिए प्रयागराज और कानपुर के एजेंट मरीज और डोनर लाते थे, जबकि वह केवल व्यवस्था और ऑपरेशन तय करता था। वह टेलीग्राम के जरिए डोनर की तलाश भी करता था। हर ट्रांसप्लांट की लोकेशन, डॉक्टरों की टीम और ऑपरेशन थिएटर की तैयारी उसी के निर्देश पर होती थी।

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करोड़ों का लेनदेन और लग्जरी लाइफस्टाइल

रोहित ने पुलिस को बताया कि एक ट्रांसप्लांट से वह लाखों रुपये कमाता था। एक केस में 60 लाख रुपये की डील हुई, जिसमें उसे 30 लाख मिले थे। इस पैसे से उसने टीम को भुगतान किया और बाकी रकम मौज-मस्ती, यात्राओं और जुए में खर्च की। वह अपनी गर्लफ्रेंड के साथ लग्जरी लाइफ जी रहा था और गोवा, नैनीताल व मनाली जैसे स्थानों पर घूमने भी गया।

कोडवर्ड ‘कमांडो सर्जरी’ और आगे की जांच

पूरे रैकेट में सुरक्षा और पहचान से बचने के लिए ‘कमांडो सर्जरी’ नाम का कोडवर्ड इस्तेमाल किया जाता था। ऑपरेशन से जुड़ी हर जानकारी इसी नाम से साझा की जाती थी। पुलिस ने अब इस मामले में कई डॉक्टरों, टेक्नीशियनों और एजेंटों की तलाश शुरू कर दी है और रोहित को रिमांड पर लेकर और पूछताछ की तैयारी की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

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