आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है, जब उसके सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ दी। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। अचानक हुए इस सामूहिक इस्तीफे से अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और उनकी टीम सकते में हैं, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे AAP के लिए बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
अन्ना हजारे ने उठाए नेतृत्व पर सवाल
इस पूरे मामले पर समाजसेवी अन्ना हजारे की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर नेताओं का पार्टी छोड़ना इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन नेताओं ने इस्तीफा दिया है, उन्हें जरूर किसी प्रकार की परेशानी रही होगी, तभी उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाया और आम आदमी पार्टी सही रास्ते पर चलती तो ऐसा नहीं होता।
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लोकतंत्र में फैसले की आजादी, लेकिन कारण गंभीर
अन्ना हजारे ने आगे कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और अपनी पसंद का निर्णय लेने का अधिकार है। चाहे राघव चड्ढा हों या अन्य नेता, सभी को पार्टी में रहने या छोड़ने की स्वतंत्रता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पार्टी सही दिशा में काम कर रही होती, तो इतने नेता एक साथ अलग होने का फैसला नहीं लेते। उनके मुताबिक, इसके पीछे और भी कई कारण हो सकते हैं, जो आने वाले समय में सामने आ सकते हैं।
















































