गोरखपुर : शहर के प्रतिष्ठित टेंट कारोबारी अतुल श्रीवास्तव के 40 वर्षीय पुत्र अम्बरीष श्रीवास्तव के असामयिक निधन की खबर ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। जैसे ही उनके निधन की सूचना फैली, सिविल लाइन स्थित आवास से लेकर राजघाट स्थित राप्ती नदी के शवदाह स्थल तक लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई स्तब्ध था, हर चेहरे पर अविश्वास और आंखों में आंसू थे। नगर निगम द्वारा निर्मित राजघाट शवदाह स्थल पर जब अम्बरीष की अंतिम यात्रा पहुंची, तो माहौल गमगीन हो उठा। ऐसा लगा मानो पूरा शहर उन्हें अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा हो। मित्र, शुभचिंतक, व्यापारी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी—जो जहां था, वहीं से भागा चला आया, बस एक झलक पाने के लिए।
अम्बरीष के पिता अतुल श्रीवास्तव अपनी मिलनसारिता और व्यवहार कुशलता के लिए पूरे शहर में जाने जाते हैं। यही कारण रहा कि उनके इस दुःख में हर वर्ग के लोग खुद को सहभागी मानते नजर आए। किसी के पास शब्द नहीं थे, सिर्फ सन्नाटा था और गहरा शोक।
सबसे मार्मिक क्षण तब आया, जब छोटे भाई नितिन श्रीवास्तव उर्फ रानू ने कांपते हाथों से अपने बड़े भाई को मुखाग्नि दी। उस पल वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। एक भाई द्वारा दूसरे भाई को दी गई यह अंतिम विदाई, हर दिल को भीतर तक तोड़ गई।
अंतिम यात्रा में कई राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हस्तियां भी शामिल रहीं। सभी ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और अम्बरीष को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक संदेश भेजकर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की। अम्बरीष के निधन से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा गोरखपुर शहर शोक में डूब गया है। हर जुबान पर बस एक ही बात थी—”इतना अच्छा, मिलनसार और हंसमुख व्यक्ति यूं अचानक कैसे चला गया।”
आज राप्ती के किनारे सिर्फ एक चिता नहीं जली, बल्कि अनगिनत दिलों की भावनाएं भी राख हो गईं। गोरखपुर ने अपने एक अपने को खो दिया—एक ऐसा चेहरा, जिसे भुला पाना आसान नहीं होगा।
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