31 दिन, 2 इस्तीफे, छात्र राजनीति पर रोक और ये तूफानी फैसले! क्या नेपाल की सियासत बदल देंगे Gen-Z नेता बालेन शाह?

नेपाल (Nepal) की राजनीति में पिछले एक महीने के भीतर तेज बदलाव देखने को मिले हैं। 27 मार्च 2026 को 35 वर्षीय बालेन शाह (Balen Shah) ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, और इसके साथ ही देश में एक के बाद एक सख्त फैसलों का सिलसिला शुरू हो गया।

शपथ के साथ ही सख्त कार्रवाई की शुरुआत

प्रधानमंत्री पद संभालते ही बालेन शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी का आदेश दिया। यह कदम पूरे देश में चर्चा और बहस का विषय बन गया। इसके बाद उन्होंने सरकारी दफ्तरों में नेताओं की तस्वीरें लगाने पर रोक लगा दी और छात्र राजनीति पर भी प्रतिबंध घोषित कर दिया।

सरकारी तंत्र में बड़े बदलाव

सरकार ने केवल नेताओं तक ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए। एक आदेश के तहत सरकारी अधिकारियों और नेताओं के बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई। सरकार का तर्क है कि इससे वीआईपी संस्कृति खत्म होगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। इसके अलावा, सरकारी कर्मचारियों के लिए वेतन प्रणाली में भी बदलाव किया गया। अब उन्हें महीने के अंत तक इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि हर 15 दिन में वेतन दिया जाएगा। इसे कर्मचारियों के मनोबल और आर्थिक प्रवाह को बेहतर बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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आम जनता पर असर डालने वाले फैसले

सरकार ने सीमावर्ती व्यापार पर भी सख्ती दिखाई है। भारत से 100 रुपये से अधिक का सामान लाने पर टैक्स को अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। हालांकि यह नियम पहले से मौजूद था, लेकिन अब इसे कड़ाई से लागू किया जा रहा है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ा है। दैनिक जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर लोगों ने इसका विरोध किया है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस कदम से आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है और इससे दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।

सरकार के भीतर ही बढ़ता असंतोष

तेजी से लिए जा रहे फैसलों के बीच सरकार के अंदर भी असंतोष उभरने लगा है। पिछले 30 दिनों में ही दो वरिष्ठ मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की बजाय व्यक्तिगत फैसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

युवाओं और समर्थकों में भी सवाल

बालेन शाह को पहले युवाओं और छात्रों का बड़ा समर्थन मिला था, लेकिन अब वही वर्ग उनके फैसलों पर सवाल उठा रहा है। खासकर छात्र राजनीति पर प्रतिबंध और उनकी कार्यशैली को लेकर ‘वन-मैन शो’ जैसी आलोचनाएं सामने आ रही हैं।

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बदलाव या विवाद आगे क्या होगा ?

बालेन शाह के पास नेपाल को आधुनिक और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का स्पष्ट विजन है, लेकिन उनकी तेज और सख्त कार्यशैली विवादों को भी जन्म दे रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या ये कदम देश को नई दिशा देंगे या फिर लोकतांत्रिक ढांचे पर दबाव बढ़ाएंगे।

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