गोरखपुर : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नवीन विनियमों के अनुरूप विद्यार्थियों को अधिक लचीली एवं विद्यार्थी-केंद्रित उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने यूजीसी (स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधि प्रदान करने हेतु अनुदेशन के न्यूनतम मानदण्ड) विनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक समिति का गठन किया है। यह समिति विश्वविद्यालय में त्वरित डिग्री कार्यक्रम (Accelerated Degree Programme-ADP) तथा विस्तारित डिग्री कार्यक्रम (Extended Degree Programme-EDP) लागू करने की रूपरेखा तैयार करेगी।
यूजीसी विनियम, 2025 के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता, रुचि एवं परिस्थितियों के अनुरूप अध्ययन अवधि में लचीलापन प्रदान कर सकते हैं। इसके अंतर्गत मेधावी विद्यार्थी निर्धारित पाठ्यक्रम एवं क्रेडिट आवश्यकताओं को पूरा करते हुए कम समय में अपनी डिग्री प्राप्त कर सकेंगे, जबकि अन्य विद्यार्थी आवश्यकता होने पर अतिरिक्त समय लेकर उसी डिग्री को पूर्ण कर सकेंगे।
विनियमों के अनुसार एडीपी और ईडीपी केवल स्नातक कार्यक्रमों पर लागू होंगे। इनमें पाठ्यक्रम, शिक्षण की गुणवत्ता, क्रेडिट, परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली नियमित कार्यक्रमों के समान ही रहेगी, केवल अध्ययन अवधि में परिवर्तन होगा। तीन वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को विद्यार्थी पाँच सेमेस्टर में तथा चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को छह अथवा सात सेमेस्टर में पूरा कर सकेंगे। वहीं विस्तारित डिग्री कार्यक्रम के अंतर्गत अध्ययन अवधि को अधिकतम दो अतिरिक्त सेमेस्टर तक बढ़ाया जा सकेगा।
यूजीसी ने यह भी व्यवस्था की है कि विश्वविद्यालय प्रथम अथवा द्वितीय सेमेस्टर के अंत में विद्यार्थियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर एडीपी एवं ईडीपी के लिए उनका चयन कर सकते हैं। त्वरित डिग्री कार्यक्रम के लिए कुल स्वीकृत प्रवेश क्षमता के दस प्रतिशत तक विद्यार्थियों को अवसर प्रदान किया जा सकेगा।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को उनकी सीखने की क्षमता और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देगी। इससे शिक्षा प्रणाली अधिक लचीली, समावेशी और परिणामोन्मुख बनेगी। उन्होंने कहा कि डीडीयूजीयू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नवाचार, बहुविषयक शिक्षा, अकादमिक लचीलापन तथा छात्र-केंद्रित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
समिति यूजीसी विनियमों में वर्णित प्रावधानों, क्रेडिट संरचना, पात्रता मानदण्डों तथा कार्यान्वयन प्रक्रिया का अध्ययन कर अपनी संस्तुतियाँ प्रस्तुत करेगी। इसके बाद विश्वविद्यालय की वैधानिक समितियों की स्वीकृति प्राप्त कर एडीपी एवं ईडीपी कार्यक्रमों को चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाएगा। इससे डीडीयूजीयू प्रदेश के उन अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल होगा जो विद्यार्थियों को अपनी गति से उच्च शिक्षा पूर्ण करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।













































