फर्रुखाबाद। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल लोहिया में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. आनंद उपाध्याय अचानक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही सामने आई। पुरुष अस्पताल की ओपीडी में तैनात फिजिशियन अपने चेंबर से नदारद मिले, जबकि कई मरीज इलाज के इंतजार में परेशान बैठे थे। हालात ऐसे थे कि सीएमओ को खुद डॉक्टर की कुर्सी संभालनी पड़ी और उन्होंने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया।
सुबह किए गए औचक निरीक्षण की शुरुआत सीएमओ ने लोहिया महिला अस्पताल से की। यहां उन्होंने ओपीडी, चिकित्सकों की उपस्थिति तथा मरीजों को मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया। महिला अस्पताल में व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सभी चिकित्सक अपने निर्धारित कक्षों में मौजूद थे और नियमित रूप से मरीजों को देख रहे थे। सीएमओ ने भी मौके पर इसकी पुष्टि की और व्यवस्थाओं पर संतोष जताया।
इसके बाद जब सीएमओ लोहिया पुरुष अस्पताल पहुंचे तो वहां की तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई दी। ओपीडी में तैनात फिजिशियन डॉ. दीपक वर्मा अपने कक्ष में मौजूद नहीं थे। उनके चेंबर के बाहर कई मरीज उपचार की प्रतीक्षा कर रहे थे। मरीजों की परेशानी देखकर सीएमओ ने तत्काल स्थिति संभाली और स्वयं चिकित्सक की कुर्सी पर बैठकर मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण शुरू कर दिया। करीब पंद्रह मिनट तक उन्होंने मरीजों को देखा और आवश्यक निर्देश दिए। इसी दौरान डिजिटल उपस्थिति प्रणाली की जांच में भी संबंधित चिकित्सक की अनुपस्थिति दर्ज पाई गई।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में संचालित केंद्र एवं प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना की स्थिति भी सवालों के घेरे में दिखाई दी। सीएमओ जब आयुष्मान मित्र काउंटर पहुंचे तो वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। इससे योजना से संबंधित जानकारी और सहायता लेने आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। सीएमओ ने अस्पताल परिसर में घूमकर साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था तथा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही अन्य सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के बाद सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी चिकित्सकों को समयपालन की सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक डॉक्टर को सुबह आठ बजे तक अनिवार्य रूप से अपने कक्ष में उपस्थित रहना होगा। यदि भविष्य में कोई भी चिकित्सक बिना सूचना के अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके खिलाफ शासन और महानिदेशक स्तर पर दंडात्मक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्यूटी से गायब मिले आयुष्मान मित्र के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई हेतु उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है। सीएमओ की इस कार्रवाई के बाद अस्पताल कर्मचारियों और चिकित्सकों में पूरे दिन चर्चा का माहौल बना रहा।













































