सहारनपुर : सहारनपुर में दिगंबर जैन मुनियों की पवित्र पिच्छी (मोरपंख से निर्मित धार्मिक उपकरण) को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री के कथित बयान के विरोध में आज जैन समाज ने जिला मुख्यालय पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपते हुए बयान वापस लेने तथा सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की मांग की.
ज्ञापन में जैन समाज ने कहा कि दिगंबर मुनियों की पिच्छी किसी भी जीव की हत्या करके नहीं बनाई जाती, बल्कि प्राकृतिक रूप से गिरे हुए मोरपंखों से तैयार की जाती है. इसका उद्देश्य सूक्ष्म जीवों की रक्षा करना और अहिंसा के सिद्धांत का पालन करना है.
समाज ने आरोप लगाया कि इस विषय पर दिया गया बयान आधारहीन है और इससे करोड़ों जैन अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, जैन समाज सहारनपुर के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने कहा कि पूरा जैन समाज इस टिप्पणी से बेहद आहत है. उन्होंने बताया कि समाज ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. उनका कहना था कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत “अहिंसा परमो धर्मः” है और दिगंबर मुनि वर्षाकाल में चातुर्मास के दौरान छोटे-छोटे जीवों की रक्षा के लिए भ्रमण तक सीमित कर देते हैं. उन्होंने कहा कि मोर अपने पंख प्राकृतिक रूप से छोड़ते हैं और उन्हीं पंखों से पिच्छी बनाई जाती है.
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उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयान से है. उन्होंने मेनका गांधी से बयान वापस लेकर जैन समाज और दिगंबर मुनियों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की अपील की. जैन समाज के उपमंत्री एवं भारतीय जैन मिलन के क्षेत्रीय समन्वयक अविनाश कुमार जैन ने कहा कि समाज लगातार मेनका गांधी से माफी मांगने की मांग कर रहा है. यदि ऐसा नहीं होता है तो कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि जैन समाज लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेगा. दिगंबर जैन महिला समाज की अध्यक्षा डॉ. रेणु जैन ने कहा कि पिच्छी दिगंबर मुनियों का संयम और जीवदया का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह कहना कि इसके लिए लाखों मोरों की हत्या होती है, पूरी तरह गलत और भ्रामक है. उन्होंने बताया कि मोर अपने पंख स्वयं छोड़ते हैं और उन्हीं त्यागे गए पंखों से पिच्छी बनाई जाती है.
उन्होंने मांग की कि मेनका गांधी अपना बयान वापस लें और जैन समाज तथा दिगंबर मुनियों से क्षमा याचना करें. उन्होंने विश्वास जताया कि जैन समाज अपनी परंपरा के अनुसार क्षमाभाव के साथ उनका स्वागत करेगा. जैन समाज के उपाध्यक्ष विपिन कुमार जैन ने कहा कि जैन समाज अहिंसा और “जियो और जीने दो” के सिद्धांत पर चलने वाला समाज है. उन्होंने कहा कि किसी भी जीव या पक्षी की हत्या करना जैन धर्म की मूल भावना के विपरीत है. उन्होंने मेनका गांधी से अपने बयान को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि जैन समाज का मौन प्रदर्शन उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति और संयम का परिचायक है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मेनका गांधी जैन समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगी.
ज्ञापन के माध्यम से जैन समाज ने राष्ट्रपति से भी मांग की कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले ऐसे बयानों पर गंभीरता से विचार किया जाए और भविष्य में किसी भी धर्म के पवित्र प्रतीकों के संबंध में गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.













































