UP: वाराणसी में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने हालात बिगाड़ दिए हैं। काशी के सभी 84 घाट पानी में डूब चुके हैं और घाटों की सीढ़ियां भी पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। सबसे ज्यादा परेशानी मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को हो रही है। घाटों का निचला हिस्सा डूबने से शवदाह के लिए जगह बेहद कम बची है। मणिकर्णिका घाट पर अब घाट से करीब 15 फीट ऊपर स्थित छत पर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।
दो दिनों में डेढ़ मीटर बढ़ा जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक गंगा का जलस्तर फिलहाल 68.35 मीटर पर है। बीते दो दिनों में नदी के जलस्तर में करीब डेढ़ मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, गुरुवार सुबह जलस्तर स्थिर रहा। गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर निर्धारित है, जबकि 71.262 मीटर पर पहुंचने के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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मणिकर्णिका घाट पर सीमित हुईं चिताएं
गंगा का पानी बढ़ने से मणिकर्णिका घाट का निचला हिस्सा पूरी तरह डूब गया है। शवदाह के लिए जगह कम होने के कारण अब एक साथ केवल 10 से 11 चिताएं ही सज पा रही हैं, जबकि सामान्य दिनों में करीब 50 चिताओं के जलने की व्यवस्था रहती है। बारिश के चलते लकड़ियां भीगने से अंतिम संस्कार में भी समय लग रहा है। दूर-दराज से शव लेकर आने वाले परिजनों को चार से पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
हरिश्चंद्र घाट का शवदाह स्थल भी डूबा
हरिश्चंद्र घाट पर भी हालात चिंताजनक हैं। यहां शवदाह स्थल पूरी तरह पानी में डूब चुका है। घाट तक पहुंचने वाला करीब आठ फीट चौड़ा मार्ग भी प्रभावित हुआ है और अब अंतिम संस्कार के लिए महज पांच फीट चौड़ी गली का सहारा लिया जा रहा है। जगह की कमी के कारण लकड़ियों को आसपास की गलियों में रखना पड़ रहा है।
गलियों में अंतिम संस्कार से बढ़ी स्थानीय लोगों की परेशानी
घनी आबादी के बीच संकरी गली में अंतिम संस्कार किए जाने से स्थानीय लोगों की दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। इसके बावजूद हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 24 घंटे जारी है। सीमित स्थान के चलते शव लेकर पहुंचने वाले परिजनों को कई घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ काशी के घाटों पर स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
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