Budget 2019 Live: बजट में मिली गाय को विशेष जगह, राष्ट्रीय कामधेनु योजना का ऐलान, पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए कर्ज में मिलेगी बड़ी छूट

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आज शुक्रवार को मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले इस कार्यकाल का अपना आखिरी बजट पेश कर रही है. बजट पेश कर रहे वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि, इस सरकार ने गाय को भी बजट में विशेष जगह दी है. सरकार ने राष्ट्रीय कामधेनु योजना का ऐलान. इसके साथ ही सरकार ने पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए कर्ज में 2 प्रतिशत की छूट दी है. गोयल ने कहा, अब पशुपालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज मिलेगा.


वेतन आयोग की सिफारिशें जल्द होंगी मंजूर

बजट में गोयल ने, वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू करने की बात कही. गोयल ने कहा, 21 हजार वेतन वाले मजदूरों को 7 हजार का बोनस. ग्रेच्युटी की सीमा दस लाख से बढ़ाकर 20 लाख की गई. साथ ही सभी कामगारों के लिए न्यू पेंशन स्कीम. मजदूरों के पेंशन में सरकार की हिस्सेदारी 4 फीसदी तक होगी. असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को 7000 रुपए का पेंशन मिलेगा. 60 साल से ज्यादा उम्र वाले मजदूरों को हर महीने 3000 रुपए का पेंशन मिलेगा. गोयल ने कहा, घरेलू कामगारों के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन नाम से मजदूरों के लिए पेंशन योजना. 10 करोड़ असंगठित मजदूरों को इस पेंशन स्कीम का लाभ मिलेगा. 21 हजार तक वेतन वाले मजदूरों का बोनस 7 हजार रुपए होगा.


उज्ज्वला योजना के तहत अभी दो करोड़ और मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाएंगे

मोदी सरकार की सबसे सफल योजना उज्ज्वला योजना पर गोयल ने गदगद होते हुए कहा कि, उज्ज्वला योजना के तहत अभी दो करोड़ और मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाएंगे. छोटे किसान को हर साल 6000 रुपए दिए जाएंगे ताकि किसानों की आमदनी बढ़े. तीन किस्त 2000-2000 रुपए मिलेंगे. पैसे सीधे खाते में जाएंगे. इसकी 100 फीसदी सरकार फंडिंग करेगी. 1 दिसंबर 2018 से लागू किया जाएगा. इस स्किम के तहत ऐसे किसान आएंगे जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन हो. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से देश के 12 करोड़ छोटे किसानों को लाभ मिलेगा. इससे सरकार पर कुल 75 हजार करोड़ रुपए का खर्च बढ़ेगा.


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर धावा

देश के संसाधनों पर पहला अधिकार गरीबों का है. पीयूष गोयल ने ऐसा कह कर सामान्य तबके के गरीब लोगों को दस फीसदी आरक्षण देने की बात को फिर दोहराया. गौरतलब है कि यूपीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है, तो इस बयान पर काफी बवाल हुआ था. उस वक्त बीजेपी की तरफ से कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया था. अब मोदी सरकार ने मनमोहन सिंह की बातों का ही जवाब देने की कोशिश की है, जिसमें तुष्टीकरण के बजाए गरीबों के कल्याण को अपने एजेंडे में उपर रखा गया.


मजदूरों को मिलेगी राहत

गोयल ने कहा कि, काम के दौरान किसी मजदूर की मौत पर EPFO की तरफ से 2.5 लाख से बढ़ाकर 6 लाख रुपए कर दिया है. साथ ही ग्रेच्युटी का भुगतान 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दिया गया है. इससे ग्रेच्युटी की रकम अब हमें ज्यादा मिलेगी. साथ ही गोयल ने कहा कि, हमारी सरकार में 10 लाख लोगों का इलाज आयुष्मान भारत के तहत हुआ. लोगों को करीब 3 हजार करोड़ रुपए का लाभ मिला.


छोटे व्यापारियों को मिली ताकत

छोटे व्यापारियों पर बात करते हुए गोयल ने कहा, पहले सिर्फ छोटे व्यापारियों पर लोन वापस करने की चिंता रहती थी, हमारे प्रयास से अब बड़े व्यापारियों को भी लोन वापस करने की चिंता रहती है. भ्रष्टाचार मुक्त सरकार पर बात करते हुए गोयल ने कहा कि, उनकी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त रही है. उन्होंने कहा कि स्थायी ग्रोथ के लिए देश ने पिछले पांच साल में काफी काम किया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है. ऐसे समय में जब NSSO के जॉब डेटा से हर तरफ खलबली मची है तब पीयूष गोयल के दावे नए विवाद खड़ा कर सकते हैं.


आरक्षण की हुई बात

आरक्षण पर बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि हमने समाज में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों की स्थिति में सुधार करने के प्रयास किए हैं. इसी का नतीजा है कि ऐसे लोगों को नौकरी और शिक्षा में आरक्षण देने की शुरुआत की गई है. साथ ही गोयल ने कहा, हमने पारदर्शिता के एक नए युग की शुरुआत की है और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार चलाई है.


प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.53 करोड़ घर बनवाए

सरकार की योजनाओं की सफलता के बारे में बात करते हुए गोयल ने कहा कि, कि 2014-18 के बीच हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.53 करोड़ घर बनवाए. साथ ही, स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत अब तक लगभग 5.45 लाख गांव खुले में शौच से मुक्त हुए हैं. एक सरकारी अभियान में जुड़कर लोगों ने इसे जन अभियान बना दिया है. गोयल ने कहा कि, हमारी सरकार, फिस्कल ईयर 2018-19 के लिए फिस्कल डेफेसिट टारगेट को 3.3 फीसदी से बढ़ा सकती है. मुमकिन है कि केंद्र सरकार यह टारगेट मिस कर दे. जब सरकार की आमदनी खर्च से कम होता है तो सरकारी घाटा बढ़ जाता है.


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