बच्चे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं – डॉ. राघवेंद्र पाण्डेय

सलेमपुर, देवरिया। महुजा स्थित विवेकानंद विद्यापीठ परिसर में आयोजित छह दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का समापन समारोह बड़े उत्साह और जोश के साथ संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. राघवेंद्र पाण्डेय ने कहा कि बच्चे इस राष्ट्र का भविष्य ही नहीं, बल्कि उसकी अमूल्य धरोहर भी हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीआरडी कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. राघवेंद्र पाण्डेय ने अपने संबोधन में बच्चों को राष्ट्र की धरोहर बताते हुए कहा कि उनका सर्वांगीण विकास ही देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव है।

विद्यार्थियों की आकर्षक प्रस्तुतियां

समापन समारोह में शिविर में शामिल बच्चों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। अश्विनी और आयुषी ने सूर्य नमस्कार की प्रस्तुति दी, जबकि आर्यन कुमार और शालू राजभर ने मल्लखम्ब का प्रदर्शन किया। अतुल पाण्डेय ने वैदिक गणित की जानकारी दी और उमंग, आदित्य, रेहान्स व दृष्टि ने नियुद्ध का प्रदर्शन किया।

रौशनी, आकृति, विवेक और हिमांशु ने विभिन्न योगासनों के साथ पिरामिड की आकर्षक प्रस्तुति दी, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रतिभागियों के अनुभव

शिविर में आए सकारात्मक परिवर्तनों को साझा करते हुए अश्विन ने भाइयों की ओर से और काजल ने बहनों की ओर से अपने अनुभव व्यक्त किए। बच्चों ने बताया कि शिविर ने उन्हें आत्मविश्वास, अनुशासन और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया है।

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शिविर के मुख्य आकर्षण

इस शिविर का सबसे बड़ा आकर्षण रस्सी मल्लखम्ब रहा, जिसका प्रशिक्षण विश्व मल्लखम्ब परिषद के महासचिव एवं पद्मश्री सम्मानित उदय देशपांडे ने दिया। वहीं वैदिक गणित का प्रशिक्षण सरस्वती विद्या मंदिर, देवरिया के शिक्षक दिलीप श्रीवास्तव ने कराया।

विद्यापीठ निदेशक का संदेश

विद्यापीठ के निदेशक प्रो. दयाशंकर पाण्डेय ‘आर्यश्री’ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिविर में सीखी गई बातों को केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित न रखें, बल्कि इन्हें समाज में भी प्रसारित करें। उन्होंने बच्चों को निरंतर अभ्यास और आत्म-सुधार की प्रेरणा दी।

धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम में प्रधानाचार्य धर्मदास, शिक्षक दिलीप गुरुजी एवं ऋतिक सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मंच संचालन शिम्पी गोंड द्वारा किया गया। शिविर के सफल संचालन में अंजली, पुष्पा, अंकिता, खुशहाली, खुशबू, सानिया, पियूष और सत्यम का विशेष योगदान रहा। यह छह दिवसीय शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ। अभिभावकों और शिक्षकों ने विद्यापीठ प्रबंधन की इस पहल की सराहना की है।

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