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मदरसे में पढ़कर युवा बन रहे आतंकी, 13 छात्र आतंकवादी संगठनों में हो चुके हैं शामिल, पुलवामा हमले में सामने आई भूमिका

jammu kashmir three madarasa teachers

जम्मू एवं कश्मीर (Jammu Kashmir) के शोपियां जिले के एक मदरसे (Madarasa) के तीन शिक्षकों पर पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया है। दरअसल इस मदरसे के कुछ छात्र आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त पाए पाए गए थे। सज्जाद भट इस धार्मिक स्कूल का पूर्व छात्र था, जिसने पिछले साल फरवरी में पुलवामा राजमार्ग पर सुसाइड बॉम्बर के तौर पर सेना के काफिले पर हमला किया था। हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान मारे गए थे।


आईजीपी (कश्मीर जोन) विजय कुमार ने बताया कि स्कूल प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी संगठन से संबद्ध है। उन्होंने सोमवार को कहा कि हमने इस स्कूल, जिसका नाम सिराज-उलुम इमाम साहिब है, उसके तीन शिक्षकों पर मामला दर्ज किया है। पीएसए के तहत बुक किए गए शिक्षकों में अब्दुल अहद भट, मुहम्मद यूसुफ वानी और रौउफ भट शामिल हैं।


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उन्होंने कहा कि स्कूल हमारी निगरानी में है और इस विद्यालय के लगभग आधा दर्जन शिक्षकों की गतिविधियां निगरानी में हैं। आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि हमारी वर्तमान कार्रवाई फिलहाल व्यक्तियों के खिलाफ है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो हम स्कूल के खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे।


पुलिस का कहना है कि इस स्कूल के 13 छात्र आतंकवादी समूहों में शामिल हो गए हैं, जिसके बाद पूरा स्कूल खुफिया एजेंसियों के निशाने पर आ गया। कुलगाम, शोपियां और अनंतनाग, इन तीन जिलों के छात्र ज्यादातर इस स्कूल में नामांकित हैं।


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सख्त पीएसए किसी भी न्यायिक हस्तक्षेप के बिना किसी व्यक्ति को अधिकतम 2 साल तक हिरासत में रखने का अधिकार देता है। यह अधिनियम मूल रूप से लकड़ी तस्करों के खिलाफ लाया गया था, लेकिन 1990 के दशक की शुरुआत में उग्रवादी हिंसा के फैलने के बाद, आतंकवादियों और अलगाववादी राजनेताओं पर भी इस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।


वहीं, मदरसे के संस्थापक मोहम्मद यूसुफ माटू ने तीन गिरफ्तारियों पर चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इन तीनों में से कोई भी उनके मदरसे में टीचर नहीं है। माटू ने कहा कि सज्जाद जैसे पूर्व छात्रों के कारण पूरे संस्थान को दोष नहीं दिया जाना चाहिए।


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