भारतीय जनता पार्टी के छह राष्ट्रीय महासचिवों में से अधिकांश नेताओं को पार्टी ने राज्यसभा के जरिए संसद तक पहुंचा दिया है। अरुण सिंह और राधा मोहन दास अग्रवाल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं, जबकि विनोद तावड़े महाराष्ट्र से उच्च सदन में पहुंच चुके हैं। हाल ही में पार्टी ने तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। दुष्यंत कुमार गौतम भी हरियाणा से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।
इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल को लेकर है। संगठन और चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बंसल को अब तक राज्यसभा नहीं भेजा गया है। खास बात यह है कि उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बेहद भरोसेमंद माना जाता है और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में संगठन विस्तार में उनकी भूमिका को काफी अहम माना जाता रहा है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो सुनील बंसल के लिए संगठन में और बड़ी जिम्मेदारी तय की जा रही है। माना जा रहा है कि उन्हें पहले राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री बनाया जा सकता है और बाद में भविष्य में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। भाजपा में पहले भी ऐसा उदाहरण देखने को मिला है। रामलाल के कार्यकाल के दौरान बी.एल. संतोष राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री थे और बाद में उन्हें संगठन महामंत्री बनाया गया।
कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व चाहे तो सुनील बंसल को सीधे राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी भी सौंप सकता है। माना जा रहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें इस पद पर बड़ी भूमिका मिल सकती है। हालांकि, इस पद पर नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहमति आवश्यक होती है, क्योंकि भाजपा में संगठन महामंत्री का पद परंपरागत रूप से संघ के प्रचारकों को ही दिया जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण होता है राष्ट्रीय संगठन महामंत्री का पद?
भाजपा में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री का पद पार्टी की सबसे प्रभावशाली जिम्मेदारियों में गिना जाता है। संगठन के बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की संरचना को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण, चुनावी रणनीति तैयार करने और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी इसी पद के पास होती है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जहां राजनीतिक फैसलों और सार्वजनिक नेतृत्व पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वहीं संगठन महामंत्री पार्टी के अंदरूनी ढांचे और जमीनी कामकाज को संचालित करता है। भाजपा की “संगठन पहले” की कार्यशैली में इस पद को पार्टी की रीढ़ माना जाता है।
भाजपा के प्रमुख संगठन महामंत्री
भाजपा के शुरुआती दौर में सुंदर सिंह भंडारी ने संगठन को मजबूत आधार देने का काम किया। उनके बाद कुशाभाऊ ठाकरे ने पार्टी विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया और बाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने।
के.एन. गोविंदाचार्य को भाजपा का प्रमुख वैचारिक रणनीतिकार माना जाता है। वहीं संजय जोशी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
वर्ष 2006 से 2019 तक रामलाल ने संगठन महामंत्री के रूप में लंबा कार्यकाल संभाला। उनके समय में भाजपा ने कई राज्यों में अपना आधार मजबूत किया। जुलाई 2019 में बी.एल. संतोष को यह जिम्मेदारी सौंपी गई और वर्तमान में वही इस पद पर कार्यरत हैं।
इसके अलावा शिव प्रकाश, सौदान सिंह और वी. सतीश जैसे नेता भी संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। भाजपा में संगठन से जुड़े कई नेताओं ने आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पहचान बनाई है।



