फर्रुखाबाद : जिले के फतेहगढ़ क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने न केवल बैंकिंग व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बुजुर्गों और असहाय लोगों के लिए बनाई गई सुविधाएं आखिर जमीन पर कितनी प्रभावी हैं। 73 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला, जिनका पैर टूटा हुआ है और जो चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं, उन्हें अपनी पेंशन प्राप्त करने के लिए ठेले पर लिटाकर बैंक तक लाया गया। घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
दर्द, लाचारी और सिस्टम की बेरुखी की तस्वीर
फतेहगढ़ के हाथी खान मोहल्ले की रहने वाली 73 वर्षीय किशन प्यारी पिछले 26 वर्षों से अपने दिवंगत पति की पेंशन प्राप्त कर रही हैं। उनके पति बिजली विभाग में कार्यरत थे और निधन के बाद से यही पेंशन उनकी आजीविका का प्रमुख सहारा है। कुछ समय पूर्व हुए एक हादसे में उनका पैर टूट गया, जिसके कारण वे बिस्तर से उठने और चलने में असमर्थ हैं।
परिवार का आरोप है कि जब उनके पोते मनु पाल बैंक में पेंशन निकालने पहुंचे और उन्होंने बैंक अधिकारियों को बुजुर्ग महिला की स्थिति से अवगत कराया, तब उन्हें बताया गया कि खाताधारक की उपस्थिति और अंगूठा सत्यापन के बिना भुगतान संभव नहीं है। परिवार ने बैंक अधिकारियों से बुजुर्ग महिला की हालत को देखते हुए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने का अनुरोध किया, लेकिन कथित तौर पर उनकी बात पर उचित ध्यान नहीं दिया गया।
जब मजबूरी बन गई ठेले की सवारी
परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि किशन प्यारी को बैंक तक कैसे पहुंचाया जाए। पैर टूटने के कारण उन्हें वाहन में बैठाना कठिन था। परिजनों ने एंबुलेंस की व्यवस्था करने का प्रयास भी किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार परिवार ने ठेला ही एकमात्र विकल्प समझा।
भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच बुजुर्ग महिला को ठेले पर लिटाकर बैंक तक लाया गया। दर्द से कराहती महिला अपने ऊपर धूप से बचाव के लिए खुद छाता पकड़े रहीं। उनका बेटा ठेला खींचता रहा और पोता साथ-साथ चलता रहा। यह दृश्य देखने वालों की आंखें नम हो गईं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें
घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने बैंक प्रशासन और व्यवस्था की आलोचना शुरू कर दी। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब सरकार और बैंक बुजुर्गों तथा दिव्यांग लोगों के लिए विशेष सुविधाओं का दावा करते हैं, तब ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई कि एक वृद्ध महिला को सम्मानजनक तरीके से बैंकिंग सेवा भी नहीं मिल सकी।
आरबीआई की गाइडलाइन पर उठे सवाल
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर बैंकों को निर्देश देता रहा है कि वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों और गंभीर रूप से बीमार खाताधारकों को विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जाए। कई बैंकों में डोरस्टेप बैंकिंग और घर जाकर सत्यापन जैसी व्यवस्थाएं भी मौजूद हैं, ताकि ऐसे लोगों को बैंक शाखा तक न आना पड़े।
ऐसे में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है कि यदि बुजुर्ग महिला वास्तव में बैंक आने में असमर्थ थीं, तो क्या उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकती थी? यही सवाल अब आमजन भी उठा रहे हैं।
बैंक मैनेजर ने दी सफाई
मामला तूल पकड़ने के बाद संबंधित बैंक शाखा के प्रबंधक प्रवेश कुमार वर्मा ने अपनी सफाई पेश की है। उनका कहना है कि परिवार को तत्काल महिला को लाने के लिए बाध्य नहीं किया गया था। उन्होंने दावा किया कि पैर टूटने की जानकारी मिलने पर परिवार को एक-दो दिन प्रतीक्षा करने की बात कही गई थी ताकि बैंक का कोई कर्मचारी घर जाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सके।
मैनेजर ने यह भी कहा कि परिवार खाताधारक को लेकर अचानक बैंक पहुंच गया। उनका कहना है कि यदि परिवार पुनः संपर्क करता है तो पूरे मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
संवेदनशीलता की मांग कर रही घटना
भले ही इस मामले में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हों, लेकिन वायरल तस्वीरों ने व्यवस्था की मानवीय संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। एक 73 वर्षीय घायल बुजुर्ग महिला का ठेले पर लादकर बैंक पहुंचना केवल एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि उन चुनौतियों का प्रतीक है जिनका सामना आज भी देश के हजारों बुजुर्ग और असहाय नागरिक कर रहे हैं।
यह घटना प्रशासन, बैंकिंग संस्थानों और संबंधित अधिकारियों के लिए एक सीख भी है कि नियमों के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण भी उतना ही आवश्यक है। आखिरकार, बैंकिंग सेवाओं का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना है, न कि उन्हें अपनी मजबूरियों का प्रदर्शन करने पर विवश करना।
फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में किसी भी बुजुर्ग को अपनी पेंशन पाने के लिए इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।














































