लोकसभा चुनाव: UP में 11 कैंडिडेट उतार कांग्रेस ने बढ़ाई SP-BSP की मुश्किलें, या तो गठबंधन में करें शामिल या नुकसान उठाएं

आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस ने पहली लिस्ट जारी कर दी है. सोनिया गांधी और राहुल गांधी चुनाव उत्तर प्रदेश के इस संसदीय क्षेत्र से किस्मत आजमाएंगे. कांग्रेस की पहली लिस्ट में कुल 15 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं. पहली सूची में उत्तर प्रदेश से 11 नामों का ऐलान किया गया है और इसके साथ ही गुजरात से चार उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया गया है.


कांग्रेस की पहली सूची पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में बड़े नामों पर भरोसा किया गया है. ये वो नाम हैं जिनका प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में जनाधार है. कांग्रेस ने पहली सूची में प्रदेश के सभी हिस्सों चाहे वो पश्चिमी हिस्सा हो , पूर्वी हिस्सा हो , मध्य हिस्सा हो या बुंदेलखंड हो हर इलाकों में ये संदेश देने की कोशिश की है वो आगामी लोकसभा चुनाव को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं. इसके साथ ही एसपी-बीएसपी गठबंधन को संकेत देने की कोशिश की है कि वो गठबंधन के लिए अपनी तरफ से कदम उठाने नहीं जा रहे हैं.



कांग्रेस के इस कदम से सबसे ज्यादा चिंता समाजवादी पार्टी (एसपी), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और राष्‍ट्रीय लोकदल के महागठबंधन को हो सकती है. मौजूदा हालात ऐसे हैं कि एसपी-बीएसपी ने आपस में सीटें बांट ली हैं. कांग्रेस ने जिन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं, उनमें रायबरेली और अमेठी को छोड़ दें तो कुल नौ सीटों पर एसपी-बीएसपी को मुश्किल हो सकती है.


11 में से पांच लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जो बीएसपी के हिस्से में गई हैं. चार लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जो एसपी के खाते में गई हैं. इन सब पर कांग्रेस ने अपने बड़े नेताओं को मैदान में उतारा है. ऐसे में अगर कांग्रेस भी एसपी-बीएसपी गठबंधन में शामिल होती है तो ज्यादा नुकसान बीएसपी को उठाना पड़ सकता है. एसपी के कोटे की चार सीटों पर भी कांग्रेस ने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है. हालांकि अगर तीनों पार्टियां साथ आती हैं, तब एसपी बदायूं की सीट नहीं छोड़ेगी क्योंकि वहां से अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव सांसद हैं.


राजनीतिक जानकारों के मुताबिक एसपी-बीएसपी के बीच 2014 के चुनाव नतीजों की बजाए 2009 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर टिकट का बंटवारा हुआ है. अब कांग्रेस ने भी लगभग इसी आधार पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है. 11 में कुल आठ सीटें ऐसी हैं, जिनपर 2009 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार जीते थे. 2009 और 2014 में कांग्रेस उम्मीदवार सहारनपुर में चुनाव नहीं जीत सके थे. इसके बावजूद इमरान मसूद सहारनपुर सीट से एसपी-बीएसपी को मुश्किल में डाल सकते हैं.


नुकसान उठाये सपा-बसपा या गठबंधन में शामिल करे

कांग्रेस ने जिस हिसाब से प्रदेश में अपने बड़े नेताओं को इन सीटों पर उतारा है, उससे तो यही लग रहा है कि वह फ्रंटफुट पर आ गई है. कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के उतरने से एसपी-बीएसपी इस बात पर मजबूर हो सकती हैं कि कांग्रेस को गठबंधन में शामिल कर लिया जाए. अगर गठबंधन में कांग्रेस को जगह नहीं मिलती है तो इसका फायदा बीजेपी को होगा. इसके पीछे वजह यह है कि 9 में से पांच सीटों पर बीएसपी को चुनाव लड़ना है. माना जाता है कि कांग्रेस और बीएसपी दोनों ही मुस्लिम, दलित और ब्राह्मण वोटों को प्रभावित करती हैं. ऐसे में अगर मामला त्रिकोणीय हुआ तो वोट बंटेंगे और फायदा सत्ताधारी दल बीजेपी को होगा.


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