मिर्जापुर: नगर पालिका परिषद सरकारी बजट को ठिकाने लगाने और कमीशनखोरी का एक और कारनामा उजागर हुआ है। विंध्याचल स्थित STP परिसर में बोरिंग तो करा दी गई, लेकिन उसके बाद न तो उसमें सबमर्सिबल मोटर लगाई गई और न ही हैंडपंप। पीवीसी पाइप के मुंह पर प्लास्टिक की बोरी बांधकर पूरे काम को लावारिस छोड़ दिया गया है।
पाइप पर बोरी बांधकर खानापूर्ति
परिसर में जमीन में धंसे बोरिंग पाइप के मुहाने पर केवल फटी बोरी लपेटकर छोड़ दी गई है। मौके पर न तो कोई कंक्रीट चबूतरा बना, न मशीन लगी और न ही जलापूर्ति शुरू हुई; केवल जमीन में पाइप धंसाकर इतिश्री कर ली गई।
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शहर भर में फर्जीवाड़े का जाल
विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर पालिका परिषद मीरजापुर क्षेत्र के विभिन्न वार्डों और मोहल्लों में दर्जनों जगहों पर इसी तरह बोरिंग कराकर छोड़ दिया गया है। आरोप है कि धरातल पर काम अधूरा रखकर फाइलों में बोरिंग को ‘सफल’ दर्शा दिया जाता है और मिलीभगत से बिल-वाउचर पास कराकर भारी कमीशन का वारा-न्यारा कर लिया जाता है।
जनता के पैसों की खुली बर्बादी
एक तरफ नगर की जनता पेयजल संकट से परेशान रहती है, वहीं दूसरी तरफ पालिका तंत्र सरकारी खजाने से सिर्फ कागजी बोरिंग का खेल खेलकर बजट खपाने में मस्त है।
सीधे और चुभते सवाल
जब बोरिंग में मोटर या हैंडपंप लगाकर पानी चालू ही नहीं करना था, तो यह बोरिंग किसके फायदे के लिए कराई गई? क्या जिला प्रशासन नगर पालिका क्षेत्र में कराई गई ऐसी तमाम बोरिंगों की मौके पर वीडियोग्राफी कराकर भौतिक जांच कराएगा? फाइलों में अधूरा काम दिखाकर बिल-वाउचर का खेल करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
















































