शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand) पर पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार (29 मई 2026) को सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत को बरकरार रखते हुए शिकायतकर्ता की याचिका खारिज कर दी। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की ओर से दायर अपील में कहा गया था कि इतने गंभीर आरोपों वाले मामले में हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर रोक देना उचित नहीं था।
सुनवाई के दौरान जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने शिकायतकर्ता से कई अहम सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि जब उन्हें कथित घटना की पहले से जानकारी थी, तो उन्होंने समय रहते पुलिस में शिकायत क्यों दर्ज नहीं कराई। अदालत ने यह भी कहा कि यदि अपराध की जानकारी पहले से थी, तो उस समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस पर शिकायतकर्ता ने जवाब दिया कि वह घटना से बेहद आहत थे, लेकिन कोर्ट उनकी दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ।
याचिका में यह भी कहा गया था कि आरोपी पर बेहद गंभीर आरोप हैं, जिनमें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है, इसलिए अग्रिम जमानत केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए। शिकायतकर्ता पक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि हाईकोर्ट द्वारा मीडिया से दूरी बनाए रखने के निर्देश का उल्लंघन किया गया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन तर्कों को राहत रद्द करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।
दरअसल, शंकपुरी पीठाधीश्वर आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया था कि प्रयागराज कैंप में दो लड़कों के साथ शारीरिक शोषण हुआ। उनकी शिकायत पर स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद शंकराचार्य ने हाईकोर्ट का रुख कर अग्रिम जमानत मांगी थी, जिस पर कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए शिकायत की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए थे।















































