रायबरेली: धार्मिक स्थल डलमऊ स्थित दीनशाह गौरा गंगा घाट के सुंदरीकरण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यटन विभाग की ओर से घाट के कायाकल्प और लैंडस्केपिंग के लिए करीब 1.75 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर कार्य के नाम पर केवल 21 सीढ़ियां और दो बड़े गमले ही दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और सरकारी धन के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।
2023-24 में मिली मंजूरी, निर्माण एजेंसी पर अनियमितता के आरोप
विभागीय जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस परियोजना को मंजूरी दी गई थी। निर्माण कार्य पर्यटन निगम के माध्यम से मेसर्स जीपी इंटरप्राइजेज को सौंपा गया। योजना में घाट का सौंदर्यीकरण, नई सीढ़ियों का निर्माण और पौधरोपण के लिए बड़े गमलों की व्यवस्था शामिल थी। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ और खर्च की गई राशि के मुकाबले धरातल पर बेहद सीमित काम दिखाई देता है।
समयसीमा खत्म, फिर भी अधूरा पड़ा निर्माण
परियोजना को वर्ष 2025 तक पूरा किया जाना था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी घाट का निर्माण अधूरा है। घाट की सीढ़ियों के आगे मिट्टी और पत्थरों का अवरोध बना हुआ है, जिससे गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी और जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा ‘नमामि गंगे’ योजना के तहत पहले से बने घाट के क्षतिग्रस्त हिस्सों की भी मरम्मत नहीं कराई गई है। मानसून शुरू होने के साथ हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
घाट की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों में रोष है। निर्भय तिवारी, स्वामी दिव्यानंद गिरि, संदीप कुमार और पुरुषोत्तम शुक्ल सहित कई लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। उनका आरोप है कि सरकारी धन का सही उपयोग नहीं हुआ और पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
नगर पंचायत चेयरमैन बोले- उच्चाधिकारियों से करेंगे शिकायत
डलमऊ नगर पंचायत के चेयरमैन पंडित बृजेशदत्त गौड़ ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि घाट निर्माण में हुई कथित अनियमितताओं की लिखित शिकायत जल्द ही संबंधित उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। उनका कहना है कि यदि सरकारी धन के उपयोग में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।















































