महिला आरक्षण बिल: लोकसभा में PM नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) को लेकर विपक्ष से समर्थन की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 50 प्रतिशत महिला आबादी को नीति-निर्माण में भागीदारी देना समय की मांग है। पीएम ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि ऐसा निर्णय दशकों पहले लिया जाना चाहिए था, लेकिन अब इसे टालना उचित नहीं है।
विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठने की सलाह
प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से न देखें और एकजुट होकर विधेयक को पारित करें। उन्होंने याद दिलाया कि यह विषय लंबे समय से चर्चा में रहा है, खासकर मुलायम सिंह यादव के दौर से ही इसकी मांग उठती रही है। पीएम ने कहा कि अब समय है कि सभी दल मिलकर महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करें।
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संसद में हल्का-फुल्का संवाद
जब समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भाषण के दौरान टोका, तो प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। ‘मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी। यह सही है कि मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। अखिलेश जी मेरे मित्र हैं तो मदद कर देते हैं। इस पर सदन में हल्की हंसी का माहौल बन गया और अखिलेश यादव भी मुस्कुराते नजर आए। इस दौरान पीएम मोदी ने यह भी कहा की मेरा मेरा दायित्व सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है और संविधान मेरे लिए सर्वोपरि है।
अपने सामाजिक पृष्ठभूमि का जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि वे अति पिछड़े समाज से आते हैं, लेकिन उनका दायित्व पूरे देश और हर वर्ग को साथ लेकर चलना है। उन्होंने कहा कि संविधान उनके लिए सर्वोपरि है और वही उन्हें सभी नागरिकों के प्रति समान जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र की ताकत ही है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी देश का नेतृत्व कर सकता है।
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विधेयक के विरोध पर चेतावनी
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि जो भी इस विधेयक का विरोध करेगा, उसे इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक क्षण बताया और सभी दलों से अपील की कि वे मिलकर इस महत्वपूर्ण कदम को सफल बनाएं, ताकि महिलाओं को उनका अधिकार और सम्मान मिल सके।










































