UP: रायबरेली में तेजी से हो रहे सड़क और बुनियादी ढांचा विकास कार्यों का असर अब पर्यावरण पर दिखाई देने लगा है। जिले में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के चलते हरित क्षेत्र लगातार सिमट रहा है। इसका प्रभाव वायु गुणवत्ता पर भी पड़ा है और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बढ़कर 97 तक पहुंच गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हरित क्षेत्र में कमी का यही क्रम जारी रहा तो आने वाले वर्षों में जिले को गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं से बढ़ा दबाव
जानकारी के अनुसार, लखनऊ-प्रयागराज हाईवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई। जिले से गुजर रहे विभिन्न मार्गों के चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों के लिए लाखों वृक्ष हटाए गए, जिससे प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कटे हुए पेड़ों की भरपाई के लिए जिस स्तर पर पौधरोपण होना चाहिए था, वह जमीन पर पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं देता।
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सरेनी क्षेत्र में भूजल स्तर बना चिंता का विषय
पर्यावरणीय बदलाव का असर जिले के सरेनी क्षेत्र में सबसे अधिक महसूस किया जा रहा है। यहां भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और कई इलाकों में पानी की उपलब्धता चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेड़ों की संख्या घटने और भूजल के अत्यधिक दोहन से स्थानीय जलवायु भी प्रभावित हो रही है। इससे कृषि भूमि की नमी कम हो रही है, जो भविष्य में खेती और उत्पादन पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
पौधरोपण के आंकड़ों पर उठे सवाल
वन विभाग द्वारा हर वर्ष बड़े पैमाने पर पौधरोपण के दावे किए जाते हैं। विभाग का कहना है कि पिछले दो वर्षों में करोड़ों पौधे लगाए गए हैं और उनमें से अधिकांश सुरक्षित हैं। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर लगाए गए पौधों की उचित देखभाल नहीं हुई, जिसके कारण बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो गए। उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति सरकारी दावों से अलग दिखाई देती है।
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वन विभाग ने तय किया नया लक्ष्य
जिला वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण के लिए नए सिरे से अभियान चलाने की बात कही है। जिला वनाधिकारी आशुतोष जायसवाल के अनुसार, जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से इस वर्ष लाखों नए पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान की शुरुआत के तहत हजारों पौधों का रोपण किया जाएगा। विभाग का दावा है कि पौधरोपण के साथ-साथ उनकी निगरानी और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि पर्यावरण संतुलन को मजबूत किया जा सके।


















































