धार्मिक आस्था के केंद्र में अव्यवस्थाओं का गरमाया मुद्दा, मंदिर प्रबंधन पर लगाया गंभीर आरोप

वृंदावन : धर्मनगरी वृंदावन के आराध्य ठा. बांके बिहारी जी का मंदिर जो करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है, अब कुछ ‘कुत्सित मानसिकता’ वाले सेवायतों की करतूतों के कारण शर्मसार हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी की तमाम सख्ती और निगरानी के दावों के बावजूद, मंदिर के अंदर ‘वसूली का धंधा’ रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आज मंदिर में जो नजारा दिखा उसने न केवल बिहारी जी की मर्यादा को तार-तार किया बल्कि आम श्रद्धालुओं के गुस्से को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया।

बिहारी जी के सामने ‘कुर्सी’, भक्तों में आक्रोश

आज राजभोग सेवा के दौरान बिहारी जी के मुख्य सिंहासन के ठीक सामने सेवायतों ने अपने यजमानों को बैठाने के लिए कुर्सियां लगा दीं। मंदिर की पवित्रता और बिहारी जी की मर्यादा को ताक पर रखकर की गई इस मनमानी को देख वहां मौजूद आम श्रद्धालु हतप्रभ और आक्रोशित नजर आए। भक्त जहां दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़े रहते हैं, वहीं सेवायत अपनी धाक जमाने के लिए बिहारी जी के सामने ही दरबार सजा रहे थे।

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’गुरु कृपा’ के नाम पर ‘फ्रॉड’ का खेल

सूत्रों के अनुसार आज का पुष्प बंगला ‘गुरु कृपा लाला मनोज गोस्वामी’ द्वारा आयोजित किया गया था। व्यवस्था के अनुसार, जिस भक्त के सौजन्य से फूल बंगला होता है उसका नाम बैनर पर होना चाहिए लेकिन यहां खेल कुछ और ही निकला। बैनर पर जानबूझकर केवल ‘गुरु कृपा’ लिखवाया गया। जानकार बताते हैं कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। रसीद भले ही किसी एक नाम की कटी हो लेकिन बैनर पर अस्पष्ट नाम लिखकर कई अन्य श्रद्धालुओं से भी फूल बंगला के नाम पर मोटी रकम वसूल ली गई। सेवायतों ने धन उगाहने के लिए अब यह ‘नया हथकंडा’ अपना लिया है।

अगला नंबर : ‘तेरा तुझको अर्पण’ का नया जाल

इतना ही नहीं, मंदिर के गलियारों में चर्चा है कि अगले कुछ दिनों में एक और फूल बंगला होने वाला है जिस पर ‘तेरा तुझको अर्पण’ का बैनर लगाया जाएगा। जानकारों का कहना है कि इस बैनर के जरिए कई और श्रद्धालुओं को यह कहकर मूर्ख बनाया जाएगा कि यह बंगला ‘उन्हीं के सौजन्य’ से हो रहा है, ताकि एक ही सेवा से कई लोगों की जेबें खाली कराई जा सकें।

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सेवायत ही उठा रहे सवाल

इस ‘फ्रॉड गिरी’ से खुद मंदिर के कुछ अन्य सेवायत भी शर्मिंदा हैं। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह सरासर गलत है। उनका साफ कहना है कि बैनर पर वही नाम अंकित होना चाहिए जिसके नाम की रसीद कटी है। लेकिन चंद पैसों की लालसा में मंदिर की गरिमा को धूमिल किया जा रहा है।

सवाल अब यह उठता है कि सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी क्या कर रही है? क्या इन सेवायतों पर नकेल कसने के लिए कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर बिहारी जी के दरबार में यह ‘वसूली का नंगा नाच’ इसी तरह जारी रहेगा