पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा (Ajay Pal Sharma) का एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस वीडियो को साझा करते हुए समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और योगी सरकार पर निशाना साधा।
अखिलेश यादव का हमला
प. बंगाल में भाजपा ने ऑब्जवर के नाम पर रामपुर व संभल में टेस्ट किये हुए अपने एजेंट भेजे हैं लेकिन इनसे कुछ होने वाला नहीं। दीदी हैं, दीदी रहेंगी!
सही समय आने पर भाजपा और उनके संगी-साथियों के इन जैसे ‘एजेंडों के एजेंटों’ की सारी आपराधिक करतूतों की गहरी जाँच होगी और बेहद सख़्त… pic.twitter.com/MlQuCiSn3p
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 27, 2026
अखिलेश यादव ने वीडियो पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा पश्चिम बंगाल में अपने ‘एजेंट’ के रूप में अधिकारियों को भेज रही है। उन्होंने कहा कि समय आने पर ऐसे लोगों की गहन जांच होगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि ऐसे अधिकारियों को न भागने दिया जाएगा और न ही भूमिगत होने दिया जाएगा- बल्कि उन्हें ‘खोजकर और खोदकर’ कानून के दायरे में लाया जाएगा। साथ ही उन्होंने उन्हें ‘लोकतंत्र का अपराधी’ तक करार दिया।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, चुनाव आयोग ने अजय पाल शर्मा को पश्चिम बंगाल में पुलिस पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया है। वायरल वीडियो में वह कथित तौर पर टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान के घर के बाहर सख्त लहजे में लोगों को चेतावनी देते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सख्ती दिखा रहे थे और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर कार्रवाई की बात कह रहे थे।
कौन हैं अजय पाल शर्मा?
2011 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। यूपी में उन्हें ‘सिंघम’ और ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ जैसे नामों से भी पुकारा गया है। पंजाब के लुधियाना के रहने वाले शर्मा ने डेंटल साइंस (BDS) की पढ़ाई की है। वर्तमान में वे प्रयागराज में ज्वाइंट सीपी के पद पर तैनात हैं और इससे पहले नोएडा, शामली, जौनपुर और रामपुर में एसपी रह चुके हैं।
टीएमसी ने उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि अजय पाल शर्मा का पिछला रिकॉर्ड विवादित रहा है और उन पर भ्रष्टाचार व उत्पीड़न जैसे आरोप लगे हैं। टीएमसी ने मांग की है कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उन्हें तुरंत पर्यवेक्षक पद से हटाया जाए।
महुआ मोइत्रा की तीखी प्रतिक्रिया
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मामले पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए व्यंग्यात्मक और आक्रामक भाषा में अधिकारी को चेतावनी दी और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए।
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राजनीतिक माहौल गरमाया
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच सियासी माहौल और गरमा गया है। एक तरफ विपक्ष निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर प्रशासनिक सख्ती को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत बताया जा रहा है।















































