लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर विवाद के बीच सरकार ने बड़ा यू-टर्न ले लिया है। ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने फैसला किया है कि अब स्मार्ट मीटर प्रीपेड की बजाय पोस्टपेड मॉडल की तरह काम करेंगे। इस बदलाव से लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
चुनाव से पहले सरकार का बड़ा दांव
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार का यह फैसला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं में काफी नाराजगी थी, जिसके बाद सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।
क्या बदलेगा सिस्टम?
नए फैसले के तहत स्मार्ट मीटर अब प्रीपेड की तरह बिजली कटौती नहीं करेंगे। उपभोक्ता बिल की तारीख तक बिजली इस्तेमाल कर सकेंगे और बिल बाद में जमा करना होगा। यानी मीटर का व्यवहार सामान्य पोस्टपेड मीटर जैसा होगा।
किरकिरी के बाद लिया फैसला
प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई इलाकों में बिना सूचना बिजली कटने, मीटर खराब होने और बिलिंग में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार आ रही थीं। इन शिकायतों और विपक्ष के हमलों के बाद सरकार को यह कदम उठाना पड़ा।
उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा के इस फैसले से उन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की संभावना है, जिन्हें प्रीपेड मीटर लगने के बाद परेशानी हो रही थी। सरकार का दावा है कि यह बदलाव उपभोक्ता हित में लिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषण
विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव को देखते हुए भाजपा सरकार विवादास्पद मुद्दों से पीछे हट रही है। स्मार्ट मीटर विवाद को शांत करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पुराने लगे प्रीपेड मीटरों को पूरी तरह पोस्टपेड मोड में बदला जाएगा या नए मीटरों पर ही यह व्यवस्था लागू होगी। ऊर्जा विभाग जल्द ही इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा।













































