लखनऊ : समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सपा पर जमकर हमला बोला है। बसपा ने आरोप लगाया कि PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की बात अखिलेश यादव नहीं कर सकते क्योंकि उनकी सरकार में इन वर्गों के साथ सबसे ज्यादा अन्याय हुआ था।
अखिलेश यादव द्वारा हाल में PDA फॉर्मूले पर जोर देने के बाद बसपा ने सपा पर पलटवार किया है। बसपा नेताओं ने कहा कि अखिलेश यादव PDA की बात करके दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
बसपा के प्रमुख आरोप
– PDA का सबसे बड़ा नुकसान सपा ने किया : बसपा ने कहा कि अखिलेश यादव कैसे PDA की बात कर सकते हैं, जबकि उनके शासनकाल में PDA वर्गों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा।
– बैकलॉग भर्ती पर रोक : यही अखिलेश यादव हैं जिनकी सरकार ने SC, ST और OBC के बैकलॉग भर्ती पर रोक लगा दी थी।
– ठेकेदारी में आरक्षण: बसपा सरकार ने SC समाज को ठेकेदारी में आरक्षण दिया था, जिसे अखिलेश यादव सरकार ने छीन लिया।
– प्रमोशन और डिमोशन: SC-ST अधिकारियों को बसपा सरकार ने प्रमोशन दिए, जबकि अखिलेश यादव ने उनका डिमोशन कर दिया।
– महापुरुषों के नामों का अपमान: अखिलेश यादव ने महापुरुषों (दलित महापुरुषों) के नाम से बने जिलों के नाम बदल दिए, जिससे दलित समाज का अपमान हुआ।
बसपा नेताओं ने कहा कि अखिलेश यादव की PDA वाली बात सिर्फ चुनावी हथकंडा है। उन्होंने याद दिलाया कि असली सामाजिक न्याय और दलित-बहुजन हितों की लड़ाई बसपा की विचारधारा से जुड़ी हुई है, न कि सपा से।
सियासी मायने
यह बसपा का हमला ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों में गठबंधन की अटकलें तेज हैं। बसपा सपा की PDA रणनीति को बेअसर करने और दलित वोट बैंक पर अपना दावा मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
अभी तक समाजवादी पार्टी की ओर से बसपा के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह बयानबाजी यूपी की सियासत में दलित-बहुजन वोटों को लेकर बढ़ती सपा-बसपा टकराहट को और तीखा बनाने वाली है।














































