उत्तर प्रदेश : सहारनपुर पहुंचे सांसद चंद्रशेखर आजाद, अयोध्या कथित घोटाले से लेकर उत्तराखंड विवाद तक सरकार पर साधा निशाना

सहारनपुर : नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद सोमवार को शब्बीरपुर कांड से जुड़े मामले में सुनवाई के लिए एमपी-एमएलए कोर्ट पहुंचे. कोर्ट में पेशी के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए अयोध्या में सामने आए कथित घोटाले, उत्तराखंड में अपने दौरे को लेकर हुए विवाद और कानून-व्यवस्था सहित कई मुद्दों पर सरकार को घेरा.

सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि पहले मंदिरों में लूट की बातें सामने आती थीं, लेकिन अब भगवान राम के नाम पर लोगों की आस्था से जुटाए गए धन में भी कथित घोटाले के आरोप लग रहे हैं. उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर सत्ता हासिल की गई और अब उसी आस्था के नाम पर जुटाए गए पैसे के दुरुपयोग के आरोप सामने आ रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में बड़े लोगों को बचाया जा रहा है, जबकि छोटे लोगों पर कार्रवाई कर केवल दिखावा किया जा रहा है. उनका कहना था कि यदि पूरे मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर बड़े अधिकारियों तक के नाम सामने आ रहे हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई जैसी एजेंसियां करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में कार्रवाई क्यों नहीं कर रही हैं.


“भगवान को पैसों की जरूरत नहीं”

चंद्रशेखर ने कहा कि भगवान को पैसों की जरूरत नहीं होती, बल्कि उनके नाम पर धंधा करने वालों को पैसों की जरूरत होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने भगवान के नाम पर राजनीति भी की और कारोबार भी किया. इस्तीफा देने वालों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई निर्दोष है, तो उसे इस्तीफा देने की जरूरत क्यों पड़ी.


बिना एफआईआर एसआईटी का गठन सवाल खड़े करता है”

सांसद ने कहा कि बिना एफआईआर दर्ज किए एसआईटी का गठन किया गया, जिसकी जांच और रिपोर्ट दोनों पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह कोई छोटी रकम का मामला नहीं है. यदि इतनी राशि सहारनपुर के विकास पर खर्च होती, तो जिले के सैकड़ों गांवों का विकास किया जा सकता था.

 

“उत्तराखंड में मिलने से रोकना लोकतंत्र पर हमला”

उत्तराखंड में अपने दौरे को लेकर चंद्रशेखर ने कहा कि यदि वहां केवल पुलिस होती तो बातचीत से मामला सुलझाया जा सकता था, लेकिन उनके सामने पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दी गई. उन्होंने कहा कि वह हमेशा संसद में पैरामिलिट्री जवानों के अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं, इसलिए उनका जवानों से कोई विवाद नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पीड़ित परिवारों से मिलने से रोका गया, जबकि वह केवल उनकी बात सुनना चाहते थे. उनके अनुसार प्रशासन सच्चाई छिपाना चाहता है. उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार ने उनसे कहा कि यदि उन्हें मिलने नहीं दिया गया, तो वे दिल्ली जाकर धरना देंगे क्योंकि वे खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं.


“धमकी मुझे नहीं, उत्तराखंड सरकार को दी गई”

चंद्रशेखर ने दावा किया कि उत्तराखंड में एक पंचायत में खुलेआम कहा गया कि यदि कोई वहां आएगा तो उसके टुकड़े कर दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि यह धमकी उन्हें नहीं, बल्कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और पूरे कानून – व्यवस्था तंत्र को दी गई है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह चीन, पाकिस्तान या बांग्लादेश है, जहां एक सांसद अपने लोगों से भी नहीं मिल सकता.

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“जानबूझकर प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयास”

उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में पहले मुसलमानों के साथ मारपीट हुई, फिर पर्यटकों और बाद में सिख समुदाय के लोगों के साथ भी घटनाएं हुईं. उनके मुताबिक कुछ लोग जानबूझकर प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं. सांसद ने कहा कि वह 30 जून को फिर उत्तराखंड जाएंगे क्योंकि वहां के लोगों की आवाज उठाना उनका कर्तव्य है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति की पीड़ा सुनी जानी चाहिए और उस पर निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए.


“पार्टी में लोकतांत्रिक व्यवस्था है”

नई राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में लोकतांत्रिक व्यवस्था है. जब भी कोई फैसला होगा, उसे सार्वजनिक किया जाएगा. उन्होंने कहा कि वह कुछ भी छिपाने में विश्वास नहीं रखते. अंत में चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि सहारनपुर ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और इसके लिए वह यहां की जनता का आभार व्यक्त करते हैं.

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