पूर्व आईपीएस अधिकारी और उत्तर प्रदेश के पूर्व एडीजी प्रेम प्रकाश ने भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़कर सांसद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। सोमवार शाम पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने घोषणा की कि वह 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि संगठन को प्रदेशभर में मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम करेंगे और पार्टी के विस्तार में अपनी भूमिका निभाएंगे।
भाजपा में रहे, लेकिन नहीं दिखी सक्रिय भूमिका
प्रेम प्रकाश 31 दिसंबर 2022 को प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली थी। उस समय उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया था। हालांकि, भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी कोई बड़ी राजनीतिक सक्रियता या संगठनात्मक भूमिका सामने नहीं आई।
सख्त पुलिसिंग और बड़े अभियानों के लिए रहे चर्चित
पुलिस सेवा के दौरान प्रेम प्रकाश की पहचान एक सख्त और प्रभावी अधिकारी के रूप में रही। कानपुर जोन में तैनाती के दौरान उनके नेतृत्व में करीब 67 पुलिस मुठभेड़ों को अंजाम दिया गया। इसके अलावा माफिया मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल से उत्तर प्रदेश की बांदा जेल लाने की कार्रवाई में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उस समय वह प्रयागराज में एडीजी के पद पर तैनात थे।
तकनीकी शिक्षा से लेकर प्रशासनिक अनुभव तक
दिल्ली निवासी प्रेम प्रकाश 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पुलिस मैनेजमेंट में एमडी (मास्टर इन डिप्लोमा) कोर्स भी किया। अपने लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने मेरठ, आगरा, मुरादाबाद, कानपुर और लखनऊ समेत कई महत्वपूर्ण जिलों में वरिष्ठ पदों पर जिम्मेदारी निभाई। जुलाई 2009 में उन्होंने लखनऊ में डीआईजी/एसएसपी का कार्यभार संभाला था, जबकि प्रयागराज में एडीजी के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण सेवाएं दीं।
‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की छवि
अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कारण प्रेम प्रकाश को पुलिस महकमे में ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के रूप में भी जाना जाता रहा। वर्ष 2019 में सीएए और एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कानपुर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भूमिका चर्चा में रही। बसपा सरकार के दौरान उन्हें मायावती के भरोसेमंद अधिकारियों में गिना जाता था। वहीं, सपा शासनकाल में उनके साइडलाइन होने की चर्चाएं रहीं। वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद उन्हें फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं।














































