फर्रुखाबाद में 1200 से अधिक मतदाताओं वाले बूथों का होगा विभाजन, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मतदेय स्थलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज

फर्रुखाबाद। आगामी वर्ष 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत जनपद में मतदेय स्थलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिन मतदान केंद्रों पर 1200 से अधिक मतदाता हैं, उनका विभाजन किया जाएगा, जबकि कम मतदाताओं वाले कुछ केंद्रों का समायोजन भी होगा। इसी विषय पर मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई।

बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अरुण कुमार सिंह सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, अपना दल (एस), सीपीआई(एम) तथा आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार मतदान केंद्रों का भौतिक सत्यापन कर उनकी समीक्षा की जा रही है। जहां एक मतदेय स्थल पर मतदाताओं की संख्या 1200 से अधिक है, वहां नए मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। वहीं कम मतदाता संख्या वाले केंद्रों का नियमानुसार समायोजन किया जाएगा।

जनपद में यह रहेगा बदलाव

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार जनपद में वर्तमान में कुल 1642 मतदेय स्थल हैं। इनमें फर्रुखाबाद विधानसभा क्षेत्र में एक तथा भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में एक नया मतदेय स्थल प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा 32 मतदेय स्थलों के समायोजन का प्रस्ताव रखा गया है। अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र में भौतिक सत्यापन के दौरान एक मतदेय स्थल का भवन जर्जर पाया गया, जिसे दूसरे उपयुक्त भवन में स्थानांतरित किया जाएगा। कायमगंज विधानसभा क्षेत्र में किसी प्रकार के बदलाव का प्रस्ताव नहीं है।

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निर्वाचन आयोग की प्रमुख गाइडलाइन

बैठक में राजनीतिक दलों को आयोग की गाइडलाइन से भी अवगत कराया गया। बताया गया कि मतदान केंद्रों का निर्धारण शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन के बाद ही होगा। किसी भी परिवार के मतदाताओं को अलग-अलग बूथों में विभाजित नहीं किया जाएगा। सभी सदस्यों के नाम एक ही मतदान केंद्र एवं अनुभाग में रखने का प्रयास किया जाएगा।

साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि मतदाताओं को मतदान के लिए दो किलोमीटर से अधिक दूरी तय न करनी पड़े। जर्जर भवनों में संचालित मतदान केंद्रों को स्थायी एवं सुरक्षित भवनों में स्थानांतरित किया जाएगा। किसी भी राजनीतिक दल या श्रमिक संगठन के कार्यालय से 200 मीटर की परिधि के भीतर मतदान केंद्र स्थापित नहीं किया जाएगा।

4 जुलाई को प्रकाशित होगी प्रारूप सूची

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 4 जुलाई 2026 को मतदेय स्थलों की प्रारूप सूची प्रकाशित की जाएगी तथा उसकी प्रति सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद सांसदों, विधायकों और राजनीतिक दलों से प्राप्त सुझाव एवं आपत्तियों का निस्तारण कर 18 जुलाई तक सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके पश्चात 31 जुलाई तक प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि यदि उन्हें किसी मतदान केंद्र के संबंध में कोई सुझाव या आपत्ति हो तो प्रारूप सूची प्रकाशित होने से पहले अथवा निर्धारित अवधि के भीतर लिखित रूप में उपलब्ध कराएं, ताकि उनका परीक्षण कर उचित कार्रवाई की जा सके।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मतदान केंद्रों का पुनर्गठन पूरी पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुरूप किया जाएगा, जिससे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव निष्पक्ष, व्यवस्थित और सुचारु रूप से संपन्न कराए जा सकें।

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