UP: आजमगढ़ में बटला हाउस एनकाउंटर की 18वीं बरसी पर राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने न्यायिक जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया।
जानिए क्या है पूरा मामला?
कौन्सिल के राष्ट्रीय महासचिव तलहा रशादी ने कहा कि बटला हाउस एनकाउंटर के बाद तत्कालीन केंद्र सरकार ने अपने कानूनी दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पुलिस एनकाउंटर की मजिस्ट्रेट जांच का प्रावधान है, इसके बावजूद बटला हाउस मामले में शुरू से ही नियम-कानून की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि घटना में एक पुलिस अधिकारी और दो छात्रों की मौत हुई, लेकिन अब तक इस मामले की न्यायिक जांच नहीं कराई गई। रशादी ने कहा कि यदि एनकाउंटर सही था तो न्यायिक जांच के बाद भी वही तथ्य सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि घटना की सच्चाई सामने आना जरूरी है।
प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने आरोप लगाया कि 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के बटला हाउस में हुई पुलिस कार्रवाई में दो मुस्लिम युवकों आतिफ और साजिद तथा पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने घटना के बाद आजमगढ़ से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन कर न्यायिक जांच की मांग की थी, जो अब भी जारी है। जिलाध्यक्ष हाजी मतीउल्लाह ने कहा कि कौन्सिल ने बटला हाउस मामले को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया है और न्यायिक जांच की मांग को लेकर उसका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक मामले की जांच नहीं होती, संगठन अपनी मांग उठाता रहेगा। प्रदर्शन के दौरान नोमान अहमद पूर्व महाप्रधान, मास्टर तारिक, मो. आरिफ, जैश अंसारी, अशरफ, मेराज खान, साकिब फराही, अजीम, खालिद अनवर, मो. फैसल, मिसबाह समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।















































