UP: प्रयागराज (Prayagraj) के फाफामऊ इलाके में एक सनसनीखेज और अमानवीय घटना उजागर हुई है। पुलिस ने बताया कि 15 वर्षीय किशोरी का अपहरण कर उसके नाम पर फर्जी आधार कार्ड और विवाहिता होने का हलफनामा बनवाया गया। इसके बाद उसे इंदिरा IVF सेंटर में लेकर जाया गया, जहाँ उसकी अंडाणु (ओवा) निकालने की प्रक्रिया कराई गई। पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है और बताया कि यह गंभीर अपराध POCSO एक्ट, अपहरण, मानव तस्करी और फर्जी दस्तावेजों से जुड़ा है।
गिरोह ने लुभावने झांसे में फंसाया
जांच में पता चला कि आरोपी गिरोह ने किशोरी को रुपये और महंगे मोबाइल आईफोन जैसे प्रलोभन देकर बहलाया। इसके बाद उसके नाम पर फर्जी आधार कार्ड तैयार किया गया, जिसमें उसे 18 वर्ष से अधिक और विवाहित दिखाया गया। इसके साथ ही एक कूटरचित हलफनामा (कंसेंट एफिडेविट) तैयार कराकर उसे विवाहिता बताया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर IVF सेंटर में अवैध तरीके से ओवा एक्सट्रैक्शन करवाई गई।
गिरफ्त में आए आरोपियों की भूमिका
पुलिस ने पांच आरोपियों को हिरासत में लिया है। इनमें IVF एजेंट कल्पना मुख्य आरोपी हैं, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया करवाई। सीमा भारती और उनका बेटा हिमांशु भारती फर्जी आधार कार्ड तैयार करने और प्रलोभन देने में शामिल थे। इसके अलावा दो महिलाएं और एक युवक गिरोह के अन्य सदस्य बताए जा रहे हैं, जो अपहरण और ब्रेनवॉशिंग में शामिल थे।
जांच में उजागर हुआ बड़ा नेटवर्क
डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। जांच से यह संकेत मिले हैं कि पिछले एक साल में कम से कम 20-25 अन्य नाबालिग लड़कियों के साथ भी इसी तरह का शोषण किया गया हो सकता है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और बड़े नेटवर्क की तलाश में जुटी है।
कानूनी कार्रवाई और समाज में चिंता
मामले में IPC की धारा 363 (अपहरण), 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जी दस्तावेज) और POCSO एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। IVF सेंटर की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं कि फर्जी दस्तावेजों पर प्रक्रिया कैसे संभव हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि गरीब और नाबालिग लड़कियों के शोषण को रोकने के लिए सरोगेसी और एग डोनेशन में सख्त नियमों की जरूरत है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसे गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।












































