चंदौली: जिले में बाढ़ आपदा से बचाव के लिए कराए जा रहे कार्यों पर अब सवाल उठने लगे हैं। सदर ब्लॉक के पड़या गांव स्थित गढ़ई नदी में चल रहे खुदाई कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की विभीषिका से बचाव के नाम पर नदी की खुदाई तो की जा रही है, लेकिन निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार देर रात जेसीबी मशीनों से नदी की खुदाई कराई जा रही है और खुदाई से निकलने वाली मिट्टी को बाजार में बेचकर आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है। मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब बाढ़ आपदा से संबंधित मॉक ड्रिल कार्यक्रम में पहुंचे जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग के सामने ग्रामीणों ने खुलकर विरोध जताया और पूरे मामले की शिकायत की।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी धन से होने वाले कार्य में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उनका कहना था कि यदि नदी की खुदाई बाढ़ नियंत्रण के उद्देश्य से हो रही है तो इसकी निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ग्रामीणों के सवालों का मौके पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी देखने को मिली। बढ़ते आक्रोश को देखते हुए जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। हालांकि खुदाई कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे बंधी विभाग की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, जिससे ग्रामीणों के आरोपों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि आखिर बाढ़ बचाव कार्य के नाम पर हो रही खुदाई में अनियमितता के आरोप कितने सही हैं और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
ग्रामीण
“नदी की खुदाई बाढ़ से बचाव के लिए हो रही है, लेकिन यहां नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। रात में जेसीबी से खुदाई कर मिट्टी बाहर बेची जा रही है। हमने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।”
जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग
“ग्रामीणों द्वारा कुछ शिकायतें हमारे संज्ञान में लाई गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग से जांच कराई जाएगी। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”













































