गोरखपुर। एक हाईटेक साइबर ठगी का मामला प्रकाश में आया है जिसमें जालसाजों ने गोरखपुर के एक व्यवसायी की कंपनी को लगभग 24 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। पूरे मामले की शुरुआत साल 2023 में हुई थी और यह ठगी करीब तीन महीने तक लगातार चलती रही।
ठगी का तरीका बेहद शातिर
जालसाज गूगल-पे या फोन-पे के जरिए कंपनी के खाते में सिर्फ **एक रुपया** ट्रांसफर करते थे। इसके बाद मोबाइल और लैपटॉप की मदद से फर्जी स्क्रीनशॉट तैयार कर लेते थे। इन स्क्रीनशॉट में एक रुपये की जगह लाखों या करोड़ों रुपये का भुगतान दिखाया जाता था। कंपनी का अकाउंटेंट इन फर्जी स्क्रीनशॉट को देखकर रकम जमा मान लेता था।
कैसे हुआ पूरा खेल?
रेल विहार फेज-1 निवासी व्यवसायी विश्वजीत श्रीवास्तव की मुलाकात कुशीनगर के सोनू जायसवाल से हुई। सोनू ने खुद को बड़ा कारोबारी बताया और अपने रिश्तेदार शिवम जायसवाल को भी कंपनी से जोड़ा। दोनों ने दिल्ली में मार्केटिंग का अनुभव बताकर कई निवेशकों को फंसाया और धीरे-धीरे ठगी का जाल फैलाया।
ऑडिट में खुला घोटाला
जब कंपनी का वार्षिक फाइनेंशियल ऑडिट हुआ, तब यह बड़ा घोटाला सामने आया। व्यवसायी विश्वजीत श्रीवास्तव ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शुरुआत में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंत में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद गुलरिहा पुलिस ने 21 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
आरोपी कहां-कहां के?
आरोपियों में कुशीनगर, गोरखपुर, बिहार और जमशेदपुर के लोग शामिल हैं। इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
पुलिस की जांच जारी
पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस गिरोह के तार अन्य राज्यों या बड़ी साइबर ठगी गैंग से जुड़े हैं। यह मामला साइबर अपराध की बढ़ती sophistication को दर्शाता है और बिजनेसमैनों के लिए सतर्क रहने की जरूरत पर जोर देता है। पुलिस इस पूरे साइबर ठगी रैकेट को पूरी तरह से उजागर करने की कोशिश में जुटी हुई है।
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