गोरखपुर : जिला कारागार में आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर आयोजित, कैदियों को दवाएं व आहार-मार्गदर्शन दिए गए

गोरखपुर। जिला कारागार गोरखपुर में बंदियों के स्वास्थ्य सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। क्षेत्रीय आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी डॉ. धर्मेन्द्र सिंह के निर्देशन में राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय द्वारा चलाए गए इस शिविर में कैदियों को मुफ्त चिकित्सा परामर्श, औषधियां और उचित आहार-विहार की विस्तृत जानकारी दी गई।

शिविर का उद्देश्य और आयोजन

कारागार प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बंदियों में आम स्वास्थ्य समस्याओं का निदान कर उन्हें आयुर्वेदिक चिकित्सा के माध्यम से राहत प्रदान करना था। शिविर में विशेष रूप से मधुमेह, श्वास संबंधी रोग, कास (खांसी) और दाद-मात जैसे त्वचा रोगों पर फोकस किया गया।

डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. जितेन्द्र कुमार, ज्ञान सागर पाण्डेय, ऋषि कुमार और संजय कुमार सहित विशेषज्ञ टीम ने बंदियों की जांच की और उन्हें व्यक्तिगत रूप से दवाएं उपलब्ध कराईं। साथ ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ के लिए आहार और दिनचर्या संबंधी मार्गदर्शन भी दिया गया।

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योग के महत्व पर विशेष जोर

शिविर के दौरान कैदियों को केवल दवा ही नहीं, बल्कि योग और प्राकृतिक जीवनशैली के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित योगाभ्यास से मानसिक तनाव कम होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और जेल जैसी बंद जगह में भी स्वास्थ्य बेहतर बना रह सकता है। कई कैदियों ने इस सत्र में सक्रिय भागीदारी दिखाई।

जेल प्रशासन की सक्रिय भूमिका

जेल अधीक्षक श्री दिलीप कुमार पाण्डेय ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि कारागार में बंद व्यक्ति भी समाज का हिस्सा हैं और उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

कार्यक्रम में जिला कारागार के वरिष्ठ परामर्शदाता बिनय कुमार रॉय, जेलर अरुण कुमार कुशवाहा, नरेश कुमार, डिप्टी जेलर आदित्य कुमार जायसवाल, विजय कुमार, श्रीमती कृष्णा कुमारी तथा अन्य कारागार कर्मचारियों की सक्रिय उपस्थिति रही।

कैदियों को मिली राहत

शिविर में शामिल कई बंदियों ने बताया कि उन्हें लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं, जिनके लिए अब उचित उपचार और दवाएं उपलब्ध हुई हैं। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से दिए गए आहार सुझावों को वे जेल की दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प भी लिया।

यह आयोजन जेल सुधार कार्यक्रम के तहत एक सराहनीय कदम माना जा रहा है, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ऐसे शिविरों को भविष्य में अन्य जेलों में भी विस्तार देने की योजना बना रहा है।

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